History of Mithila

Articles on the History of Mithila

हरिसिंहदेवक पराजय आ हिमालयक जंगल दिस भागि जेबाक तिथिक सम्बन्धमे जे परम्परागत श्लोक वर्तमानमे उपलब्ध अछि से भाषाक दृष्टिसँ ततेक अशुद्ध भए गेल अछि जे ओहि पर विश्वास करब कठिन। एतेक धरि जे प्रो. राधाकृष्ण चौधरी सेहो अशुद्ध रूप मे उद्धृत कए देने छथि- “वाणाब्धि बाहु सम्मित शाकवर्षे पौषस्य शुक्ल दशमी क्षितिसूनुवारे। त्यक्त्वा स्व–पट्टन पुरी हरिसिंह देओ दुर्दैव देशित पथे गिरिमाविवेश”। continue reading>>


लोहना गाँव झंझारपुर प्रखण्ड अंचल में अवस्थित एक विशाल गाँव है। यह उत्तर बिहार में मुजप्फरपुर-फारविसगंज राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 57 पर दरभंगा से 40 कि.मी. पूर्व अवस्थित है। इस गाँव के उत्तर में हटाढ रुपौली, जमुथरि, कथना, रैमा, हैंठी बाली आदि गाँव हैं, पूर्वमे नरुआर, सर्वसीमा, दक्षिण में उजान तथा पश्चिम मे, सरिसब, लालगंज, खडरख आदि गाँव हैं। continue reading>>


History of Chikna village by Arjun Jha ‘Nirala’ “चिकना गामक इतिहास ओ वंशावली”,  लेखक  श्री अर्जुन झा ‘निराला’

वयोवृद्ध लेखक श्री निरालाजी जनसंसाधन विभाग, बिहार सरकारमे विभिन्न पद पर कार्य करैत प्रभारी राजस्व उप-समाहर्ता पद सँ 1994 ई. मे निवृत्त भेलाह। चिकना वासी रहबाक कारणें अपन गामसँ पूर्ण परिचिति हिनक एहि लेखनक प्रामाणिकता स्पष्ट करैत अछि। लेखक सूचना दैत छथि जे ओ आरम्भमे “सुप्रभात” नामक हस्तलिखित मासिक पत्रिकामे कविता आ कथा सेहो लिखैत रहथि। ई राजनीतिसँ सेहो जुडल रहलाह आ स्व. ललित नारायण मिश्रक राजनीतिक-यात्रामे सहायक भेल रहथिन। चिकना गाममे गठित “विश्वभारती वाग्वर्द्धिनी सभा”क संचालनमे सेहो हिनक स्मरणीय योगदान रहल अछि। continue reading>>


  • The site of ancient Mithila  प्राचीन काल की मिथिला नगरी का स्थल-निर्धारण (जानकी-जन्मभूमि की खोज)

Goddess Sita, or janki, was born in a furrow ploughed on the present site of Sita-Marhi by her father, whose name was Raja Janak, hence Sita is sometimes called Janaki, or “daughter of janak.

मिथिला क्षेत्र की मिट्टी बहुत कोमल है और यहाँ बाढ के कारण बहुत तबाही हुई है। पहाड नहीं होने के कारण कच्ची मिट्टी, लकड़ी घास-फूस से यहाँ घर बनाने की परम्परा रही है अतः यहाँ अधिक पुराने अवशेष पुरातात्त्विक साक्ष्य के रूप में मिलना असंभव है। अतः किसी स्थान के निर्धारण के लिए हमे साहित्यिक स्रोतों और किसी स्थान के प्रति लोगों की श्रद्धा को ही स्रोत मानने की मजबूरी है। ये दोनों स्रोत जहाँ एक दूसरे से मेल खाते हैं उसे ऐतिहासिक साक्ष्य माना जा सकता है। continue reading>>


  • Ganga-worship मिथिला के धर्मशास्त्रीय-ग्रन्थों में गंगा

गंगा भारत की नदियों में श्रेष्ठ मानी गयी है। ऋग्वैदिक काल से आजतक इसकी महिमा गायी जाती रही है। यहाँ तक कहा गया है कि गंगा के जल को स्पर्श करनेवाली वायु के स्पर्श से भी सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। धर्मशास्त्र की परम्परा में भी गंगाजल को अत्यन्त पवित्र मानकर उसे सदापुण्या कहा गया है। continue reading>>


Remains of an old Shiva temple at Lohna village लोहना गाँव में प्राचीन शिवमन्दिर के अवशेष

मधुबनी जिला के झंझारपुर प्रखण्ड के अन्तर्गत लोहना गाँव में प्राचीन शिवलिंग एवं मन्दिर के अवशेष बिखरे पडे हैं। यह स्थान लखनदेई नदी की प्राचीन धारा के पूर्वी तट पर अवस्थित एक पुराने टीले पर है। वर्तमान में यहाँ एक नीम का पेड है, जिसके नीचे लोक देवता सलहेस का प्राचीन स्थान है। यह स्थान मकसूदन बाबा के थान के नाम से प्रख्यात है। continue reading>>

 

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