Brahmi Publication

Mithila, History, Literature and Art

Researches

Researches on Mithila

दीपावली सम्पूर्ण भारतवर्ष में श्रद्धा एवं विश्वास के साथ मनाया जानेवाला प्रमुख पर्व है । इस दिन के साथ कई कथाएँ एवं ऐतिहासिक घटनाएं जुडी हुई है ।

नये वर्ष का आरम्भ- व्यवसाय-जगत् में भी दीपावली के दिन ने नवीन वित्तीय वर्ष प्रारम्भ करने की परम्परा आज भी विद्यमान है। Continue Reading>>

Published in the book “ Asiatic Researches; or Transactions of the Society, Vol. 1, 1808 A.D.

छठ पर्व में भगवान् सूर्य की उपासना के साथ स्कन्द की माता षष्ठिका देवी एवं स्कन्द की पत्नी देवसेना इन तीनों की पूजा का महत्त्वपूर्ण योग है। इसी दिन कुमार कार्तिकेय देवताओं के सेनापति के रूप में प्रतिष्ठित हुए थे अतः भगवान् सूर्य के साथ-साथ इन सभी देव-देवियों के नाम इस पर्व के साथ जुड़ गये हैं और कालान्तर में इसका स्वरूप बृहत् हो गया है। धर्मशास्त्रीय ग्रन्थों में इसे स्कन्दषष्ठी, विवस्वत्-षष्ठी इन दोनों नामों से कहा गया है। Continue reading>>


साम्ब-पुराणम्
Price- 200.00, Get Printed book

छठ पर्व में भगवान् सूर्य की उपासना के साथ स्कन्द की माता षष्ठिका देवी एवं स्कन्द की पत्नी देवसेना इन तीनों की पूजा का महत्त्वपूर्ण योग है। इसी दिन कुमार कार्तिकेय देवताओं के सेनापति के रूप में प्रतिष्ठित हुए थे अतः भगवान् सूर्य के साथ-साथ इन सभी देव-देवियों के नाम इस पर्व के साथ जुड़ गये हैं और कालान्तर में इसका स्वरूप बृहत् हो गया है। धर्मशास्त्रीय ग्रन्थों में इसे स्कन्दषष्ठी, विवस्वत्-षष्ठी इन दोनों नामों से कहा गया है। Continue reading>>


Kesaria Stupa in East Champaran

पछवारि मिथिलामे अवस्थित केसरिया स्तूप एखनि बौद्ध पुरातात्त्विक केन्द्र मानल जाइत अछि, मुदा ओहिठाम सँ अतीतमे जे एकटा दशावतारक  किछु मूर्ति भेटल छल, ओहि पर शिलालेख सेहो छल, ताहि मूर्तिक कोनो उल्लेख बादमे नहिं भेटि रहल अछि। Continue reading>>


हरिसिंहदेवक पराजय आ हिमालयक जंगल दिस भागि जेबाक तिथिक सम्बन्धमे जे परम्परागत श्लोक वर्तमानमे उपलब्ध अछि से भाषाक दृष्टिसँ ततेक अशुद्ध भए गेल अछि जे ओहि पर विश्वास करब कठिन। एतेक धरि जे प्रो. राधाकृष्ण चौधरी सेहो अशुद्ध रूप मे उद्धृत कए देने छथि- Continue Reading>>


Buddhacharitam restored by Pt. Bhavanath Jha

‘Buddhacharitam’, an epic in the tradition of classical Sanskrit language and literature composed by the great Buddhist scholar Ashvaghosh is highly respected in Asian Buddhism. Continue reading>>


According to the testimony of the great Buddhist Chinese pilgrim Hieun-Tsang, who travelled throughout the great part of India in the first half of 7th century A.D. has clearly stated that the magnificent Mahabodhi temple was constructed by a Shaiva devotee under the instruction of Lord Shiva and the image of Buddha enshrined in the main temple by Shaiva devotee and Budh Pokhar, too, was excavated by his Shaiva brother. Continue reading>>


  • Sacred Cow in Hinduism गावः सन्तु मातरः

जहाँ एक गाय को बचाने के लिए दिलीप-जैसे प्रतापी राजा अपना शरीर तक त्याग कर देने की बात करें, वहाँ गाय को मारकर खाने की बात करना बकबास है।

भारत मे प्राचीन काल से गाय माता मानी गयी है। ऋग्वेद के प्रथम मण्डल के 110वें सूक्त में ऋभुदेव की बडाई करते हुए कहा गया कि हे ऋभुदेव आपने ऐसी गाय को हृष्टपुष्ट बना दिया है, जिसके शरीर पर केवल चमडा ही शेष रह गया था। आपने एक बछडे को अपनी माता से संयुक्त करा दिया है। आपने अपने सत्प्रयास से एक वृद्ध माता-पिता को भी युवा बना दिया है। Continue reading>>


आश्विन पूर्णिमा कें सन्ध्याकाल चन्द्रमाक उदय भेला पर लक्ष्मीक पूजा करी। ब्रह्मपुराणमे कहल गेल अछि- प्रदोषे पूजयेल्लक्ष्मीमिन्द्रमैरावतस्थितम्। निशीथे वरदा लक्ष्मी को जागर्तीति भाषिणी।तस्मै वित्तं प्रयच्छामि अक्षैः क्रीडां करोति यः। Continue reading>>


विश्वकर्मा प्राचीनतम वैदिक देवताओं में से एक हैं। वैदिक साहित्य में त्वष्टा तथा तक्षा के नाम से इनका उल्लेख मिलता है। ऋग्वेद के अनुसार इन्द्र ने जिस वज्र से वृत्रासुर का वध किया था उसके निर्माता त्वष्टा थे। इन्द्रसूक्त में कहा गया है कि त्वष्टास्मै स्वर्यं वज्रं ततक्ष अर्थात् इनके लिए त्वष्टा ने आवाज करनेवाला वज्र को छीलकर नुकीला बनाया। continue reading>>


लोहना गाँव झंझारपुर प्रखण्ड अंचल में अवस्थित एक विशाल गाँव है। यह उत्तर बिहार में मुजप्फरपुर-फारविसगंज राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 57 पर दरभंगा से 40 कि.मी. पूर्व अवस्थित है। इस गाँव के उत्तर में हटाढ रुपौली, जमुथरि, कथना, रैमा, हैंठी बाली आदि गाँव हैं, पूर्वमे नरुआर, सर्वसीमा, दक्षिण में उजान तथा पश्चिम मे, सरिसब, लालगंज, खडरख आदि गाँव हैं। continue reading>>


शक्ति शब्द किसी कार्य को करने के सामर्थ्य भाव दर्शाता है। शक्ति चूँकि स्त्रीलिंग शब्द है, इसमें क्तिन् प्रत्यय लगा हुआ है अतः प्राचीन काल से शक्ति की उपासना देवी के रूप में की जाती रही है। काली, दुर्गा, सीता, लक्ष्मी, सरस्वती, आदि रूपों में उनकी पूजा का प्रचलन आदिकाल से ही रहा है। वैदिक साहित्य में भी उषा का स्वरूप देवी के समान ही है, जो सूर्य के आगे आगे चलती हुई मानव जीवन को प्रेरित करती हैं। Continue reading>>


Buddhacharitam’, an epic in the tradition of classical Sanskrit language and literature composed by the great Buddhist scholar Ashvaghosh is highly respected in Asian Buddhism. This epic describes the Life, Acts and Sermons of Lord Buddha in poetic way with a musical softness. continue reading>>


Buddhacharitam restored by Pt. Bhavanath Jha

Pt. Bhavanath Jha from the English translation of Tibetan version by E.H. Johnston, with Introduction by : Acharya Kishore Kunal, Former Vice-chancellor, Kameshvara Singh Darbhanga Sanskrit University, Darbhanga, Bihar. continue reading>>


(जानकी-जन्मभूमि की खोज)मिथिला क्षेत्र की मिट्टी बहुत कोमल है और यहाँ बाढ के कारण बहुत तबाही हुई है। पहाड नहीं होने के कारण कच्ची मिट्टी, लकड़ी घास-फूस से यहाँ घर बनाने की परम्परा रही है अतः यहाँ अधिक पुराने अवशेष पुरातात्त्विक साक्ष्य के रूप में मिलना असंभव है। Continue reading>>

  • Ganga-worship मिथिला के धर्मशास्त्रीय-ग्रन्थों में गंगा
Ganga Worship

गंगा भारत की नदियों में श्रेष्ठ मानी गयी है। ऋग्वैदिक काल से आजतक इसकी महिमा गायी जाती रही है। यहाँ तक कहा गया है कि गंगा के जल को स्पर्श करनेवाली वायु के स्पर्श से भी सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। धर्मशास्त्र की परम्परा में भी गंगाजल को अत्यन्त पवित्र मानकर उसे सदापुण्या कहा गया है। continue reading>>


मधुबनी जिला के झंझारपुर प्रखण्ड के अन्तर्गत लोहना गाँव में प्राचीन शिवलिंग एवं मन्दिर के अवशेष बिखरे पडे हैं। यह स्थान लखनदेई नदी की प्राचीन धारा के पूर्वी तट पर अवस्थित एक पुराने टीले पर है। वर्तमान में यहाँ एक नीम का पेड है, जिसके नीचे लोक देवता सलहेस का प्राचीन स्थान है। यह स्थान मकसूदन बाबा के थान के नाम से प्रख्यात है। continue reading>>

पटना रेलवे स्टेशन के सामने का ताँगास्टैंड तो तोड दिया गया, पर मेरे संग्रह में दो पुराने चित्र ऐतिहासिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं। दरभंगा के महाराज रमेश्वर सिंह ने 1928 ई. में यह ताँगा स्टैंड इरविन के पटना आगमन पर बनवाया था। यह पटना साइंस कालेज के उद्घाटन का अवसर था, जिसमें भाग लेने के लिए इरविन 15 नवम्बर, 1928 को पटना पहुँचे थे। continue reading>>


दिनांक 05 मई, 2017 कें हम कोइलख गाम स्थित भद्रकाली मन्दिरमे दर्शनक लेल गेलहुँ। ओहीठाम मन्दिरक सामने उत्तरमे एकटा महादेव मन्दिर अछि। ई पूरा परिसर ऊँच डीहपर अवस्थित अछि। continue reading>>


हाल के कुछ वर्षों में पाण्डुलिपियों के अध्ययन एवं प्रकाशन के क्रम में इन पंक्तियों के लेखक को  रुद्रयामल तन्त्र के एक अंश के नाम पर परवर्ती काल में लिखी दो रचनाएँ मिलीं हैं, जिनमें मिथिला के इतिहास एवं भूगोल पर कुछ सामग्री है। एक रचना रुद्रयामलसारोद्धारे तीर्थविधिः के नाम से है जिसका प्रकाशन मैथिली साहित्य संस्थान की शोधपत्रिका मिथिला भारती के नवांक 1 में हुआ है। इसमें कुल 98 श्लोक हैं। इसमें अधिकांश वर्णन मिथिला से बाहर के तीर्थों काशी प्रयाग, गंगा-सरयू संगम क्षेत्र आदि का है, किन्तु घटना चक्र के केन्द्र में मिथिला का गंगातट है, जो बेगूसराय जिला में अवस्थित चमथा घाट है। continue reading>>


Description of Available Sanskrit Manuscripts in personal Possession. Contact us for digital copy and further assistance.  continue reading>>

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!