Shravan Kumar Awards instituted by Mahavir Mandir Trust

Shravan kumar

महावीर मन्दिर द्वारा संचालित श्रवण कुमार पुरस्कार योजना अनुशंसा के अभाव में बाधित

अनुशंसा आमन्त्रित>>

वृद्धों के हित के लिए महावीर मन्दिर द्वारा सार्थक प्रयास

यावद्वित्तोपार्जनशक्तस्तावद् निजपरिवारो रक्तः।

पश्चाद् जीवति जर्जरदेहे वार्ताम् कोऽपि न पृच्छति गेहे।।

-आदि शंकराचार्य

आदि शंकराचार्य ने आज से करीब 1200 वर्ष पूर्व वृद्धों के विषय में जो बातें लिखी थीं, वह आज भी हम समाज में पाते हैं। वृद्ध होने पर अधिकांश लोगों की दशा दयनीय हो जाती है। संयुक्त परिवार की टूटती हुई अवधारणा ने तो उन्हें और चिन्तनीय स्थिति में खड़ा कर दिया है। पुत्रियाँ ससुराल चली जाती हए नौकरीपेशा पुत्र अपने ध्रुवीकृत परिवार को लेकर या तो दूर स्थान पर चले जाते हैं या एक ही साथ रहते हुए भी इतने आत्मकेन्द्रित हो जाते हैं कि माता-पिता के लिए उनके पास फुरसत नहीं रह जाती है। घर में रखे फालतू सामान की तरह माता-पिता के साथ होता हुआ व्यवहार आज का यथार्थ बनता जा रहा है, जो चिन्तनीय है।

लेकिन आज भी हम हताश नहीं है। ‘अन्धेरा अन्धेरा’ चिल्लाने के बजाय एक नन्हा-सा दीया भी जलाने का उपाय यदि शेष है तो हमें आशा की एक किरण देखनी होगी। हमारी सभ्यता ‘मातृ-देवो भव’, ‘पितृ-देवो भव’ की है। हमारे आदर्श श्रवण कुमार हैं। आज भी भारत पूर्णतः अपसंस्कृत नहीं हुआ है। हमें विश्वास है कि वर्तमान में भी अनेक ‘श्रवण कुमार’ सब कुछ छोड़कर, माता-पिता की सेवा कर रहे है। पुत्रियाँ भी इस कार्य में पीछे नहीं हैं। इनके कार्यों को सम्मान देकर, इनके कार्यों को प्रसारित करने की आज आवश्यकता है, ताकि समाज इनसे प्रेरणा ग्रहण करे और फिर से हमारे आदर्शों की स्थापना हो सके। समाज को एक दिशा मिले, इसके लिए सामाजिक संस्थाओं को आगे आना होगा, ताकि ऐसे पुत्रों और पुत्रियों के कार्यों को प्रचारित-प्रसारित उनके आदर्शों को महिमामण्डित करे।

बिहार के प्रसिद्ध महावीर मन्दिर, पटना के द्वारा ‘श्रवण कुमार पुरस्कार योजना’ की घोषणा इस दिशा में किया गया श्लाघ्य प्रयास है। 2010 ई. से यह योजना चल रही है। हनुमान् मन्दिर की न्यास समिति श्री महावीर स्थान न्यास समिति, पटना के द्वारा प्रत्येक वर्ष शारीरिक एवं आर्थिक दृष्टि से कमजोर माता-पिता की उत्कृष्ट सेवा करनेवाले पुत्रों एवं पुत्रियों को प्रोत्साहित करने के लिए श्रवण कुमार पुरस्कार की योजना चल रही है।

यह पुरस्कार ऐसे लोगों को दिया जाता है, जो स्वयं शारीरिक एवं आर्थिक रूप में आस्थापूर्वक निःस्वार्थ भाव से अपने वृद्ध माता-पिता की सेवा कर रहे हैं तथा समाज में चर्चा का विषय बन चुके हैं, एवं जिनका आदर्श अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणाप्रद बन गया है। इस प्रकार माता-पिता की निःस्वार्थ सेवा वस्तुतः व्यक्तिगत रूप से की गयी सेवा मानी जायेगी, न कि वृद्धाश्रम के माध्यम से। इस पुरस्कार के लिए महावीर मन्दिर न्यास समिति के द्वारा राज्य मानवाधिकार आयोग के वर्तमान अध्यक्ष, अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति एस. एन. झा की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गयी है।

इस पुरस्कार के लिए कोई पदाधिकारी, चिकित्सक, स्वयंसेवी संस्थाएँ, मुखिया, सरपंच या कोई जिम्मेदार व्यक्ति नाम की अनुशंसा निःस्वार्थ सेवा सम्बन्धी विभिन्न साक्ष्यों को संलग्न करते हुए महावीर मन्दिर के कार्यालय में भेज सकते हैं। इसके तहत प्रथम पुरस्कार 1 लाख, द्वितीय पुरस्कार 50 हजार, तृतीय पुरस्कार 25 हजार एवं 5 व्यक्तियों को सान्त्वना पुरस्कार 5 हजार रुपये देने की घोषणा की गयी है।

प्रथम बार 2010 ई. में जानकी नवमी के अवसर पर दिनांक 23 मई को इस पुरस्कार का वितरण किया गया। इस वर्ष एक लाख के प्रथम पुरस्कार के लिए किसी को भी उपयुक्त नहीं पाया गया। द्वितीय पुरस्कार के लिए श्रीमती किरण देवी, ग्राम-पो.- मड़वा, प्रखण्ड- बिहपुर, जिला- भागलपुर को उपयुक्त पाया गया। वे अपने लकबाग्रस्त माँ की सेवा 20 वर्षों तक करती रहीं। इनके लिए जिला प्रशासन की भी अनुशंसा मिली थी। इन्हें 50,000 रुपये की राशि एवं प्रशस्ति-पत्रा से पुरस्कृत किया गया। तृतीय पुरस्कार निम्नलिखित दो व्यक्तियों को दिया गया। इनमें से प्रत्येक को 25,000 रुपये की राशि एवं प्रशस्ति-पत्र पुरस्कार स्वरूप दिया गया। इन दोनों के नाम हैं-

(1) श्री सुनील उपाध्याय, ग्राम-सदाबेह, थाना-दुल्हिन बाजार, बिक्रम, पटना।

(2) श्री पंकज कुमार, ग्राम-कुरौनी, पंचायत-मेहुस, जिला- शेखपुरा। प्रोत्साहन पुरस्कार छः व्यक्तियों को देने का निर्णय लिया गया।

इसके बाद अगले वर्ष 2011 में भी 11 मई को एक लाख के प्रथम पुरस्कार के लिए श्री शिव कुमार का चयन किया गया। ग्राम+पो.- धनगाँवा, जहानाबाद के मूल निवासी एवं पेशा से  प्राइवेट शिक्षक श्री शिव कुमार अपनी लाचार माँ को बँहगी पर लादकर तीर्थाटन कराते रहे हैं, जिसकी चर्चा समाचार पत्रों में भी हुई है।

द्वितीय पुरस्कार ग्राम- इसहपुर, रामनगर, सनकोर्थु सरिसब-पाही, जिला मधुबनी के निवासी श्री उदय कुमार झा को दिया, जो 10-12 वर्शों से रोगग्रस्त, उठने-बैठने में भी असमर्थ 97 वर्षीय पिता तथा अन्धी माता की सेवा पति-पत्नी मिलकर करते रहे हैं। इन्हें 50,000 रुपये की राशि एवं प्रशस्ति-पत्र से पुरस्कृत किया गया।

तृतीय पुरस्कार के लिए ग्राम इनरवा, डाकघर औरैया, थाना आदापुर, पूर्वी चम्पारण के मूल निवासी मो. तुफैल अहमद को दिया गया है। इनकी माँ का देहान्त बहुत पहले हो गया है। इनके पिता 80 वर्ष के हैं, जिनका दिमागी सन्तुलन ठीक नहीं है और नित्यकर्म भी बिना सहायता के नहीं कर सकते हैं। श्री तुफैल अहमद अपनी पत्नी के साथ पिता की सेवा अपने हाथों करते रहे हैं। इन्हें 25,000 रुपये की राशि एवं प्रशस्ति-पत्र पुरस्कार स्वरूप दिया गया। प्रोत्साहन पुरस्कार तीन व्यक्तियों को दिया गया।

फिर 29 अगस्त 2013 को प्रथम पुरस्कार के लिए श्री कृष्णानन्द भारती, तोपखाना बाजार, कटघर, जिला- मुंगेर का चयन किया गया।

द्वितीय पुरस्कार के लिए श्री गौतम कुमार, ग्राम-पो.- सरसई, जिला- वैशाली को उपयुक्त पाया गया। इन्हें, 50,000 रुपये की राशि एवं प्रशस्ति-पत्र से पुरस्कृत किया गया।

तृतीय पुरस्कार के लिए चयन-समिति के द्वारा श्री राजेश कुमार सिंह, विद्यापुरी मुहल्ला, जिला- मधेपुरा को चयनित किया गया है। इसके अतिरिक्त प्रोत्साहन पुरस्कार तीन व्यक्तियों को देने का निर्णय लिया।

महावीर मन्दिर की ओर से ऐसा सार्थक प्रयास करने के बाद भी इस योजना के साथ विडम्बना रही है कि समाज की ओर से अनुशंसा नहीं मिल रही है। अनेक बार समाचार-पत्रों के माध्यम से विज्ञापन दिये जाने पर आवेदन तो मिलते हैं, किन्तु दूसरे लोग अनुशंसा नहीं भेजते हैं।

प्रत्येक वर्ष सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखे जाते है कि वे भी अपने तन्त्र के माध्यम से ऐसे आदर्श पुत्रों और पुत्रियों के नाम की अनुशंसा करें, किन्तु उत्साहवर्द्धक प्रतिक्रिया नहीं मिलती। फलतः कई वर्ष इस पुरस्कार को स्थगित कर देने की स्थिति भी आ रही है। यह भी एक चिन्तनीय विषय है कि क्या समाज अपने किसी ऐसे पड़ोसी श्रवण कुमार के प्रति आस्थावान् नहीं है?

महावीर मन्दिर की ओर से वृद्धों के लिए अन्य सुविधएँ भी अपने अस्पतालों में दी जी रहीं है। उन्हें शुल्कों में विशेष छूट दी जा रही है।

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