Brahmi Publication

Mithila, History, Literature and Art

Procedure of  Bhai dooj in Mithila


मिथिलाक परम्परामे भ्रातृद्वितीयाक स्वरूप

⇐ एकर पौराणिक महत्त्व आ विवेचन

एहि दिन मिथिलामें सभसँ पहिने आँगनसँ दरुखा धरि बाट निपबाक प्रथा अछि। भाव ई छैक जे भाइ बाहरसँ औताह तँ हुनका लेल बाट नापि राखल जाए।

अरिपन

आँगनमे अरिपन देल जाइत अछि, आ ओकर पश्चिम मे अरिपन देल पीढी राखल जाइत अछि। अरिपनक बीच  अढिया मे पानक पात, लवंग इलायची, कुम्हरक फूल, सुपारी देल रहैत अछि। आ एक लोटामे अच्छिन्न जल (जाहि लोटासँ जल लए आन काजमे व्यवहार नहिं भेल हो) आ सिन्दूर पिठार राखल रहैत अछि। भाइक अएला पर ओ धुरिआएले पएरें (अर्थात् पयर धोनहिं बिना) तौनी-पाग नेने पिढी पर पूव मुँहें आँजुर बान्हि बैसैत छथि। बहिन हुनक दुनू हाथ आ पयरमे पिछार आ सिन्दूर लगाए हुनक अंजलि मे ओ पान आदि अढियामे राखल वस्तु दैत छथि। तखनि ठाढ भए निहुरि ओहि भायक आँजुर मे जल खसबैत मन्त्र पढैत छथि-

भ्रातस्तवाग्रजाताहं भुङ्क्ष्व भक्तमिदं शुभम्।

प्रीतये यमराजस्य यमुनाया विशेषतः।।

अर्थात् हे भाइ हम अहाँक जेठ बहिन छी। अहाँ यमराज आ विशेष रूपसँ यमुनाक प्रसन्नता लेल एहि भातक भोजन करू।

एहि मन्त्रसँ बहिन भाइ कें भोजन करबाक निमित्त आमन्त्रण दैत छथिन। एकरा नोंत लेब कहल जाइत अछि।

जँ बहिन छोट रहथि तँ मन्त्र एना होएत-

भ्रातस्तवानुजाताहं भुङ्क्ष्व भक्तमिदं शुभम्।

प्रीतये यमराजस्य यमुनाया विशेषतः।।

अर्थात् हे भाइ, हम अहाँक छोट बहिन छी। अहाँ यमराज आ विशेष रूपसँ यमुनाक प्रसन्नता लेल एहि भातक भोजन करू।

संस्कृतमे जँ नहिं पढि सकी तँ मैथिलीमे कही-

यमुना नोतलनि यमकें हम नोतै छी भाइकें।

हमरा नोतने भाइक अरुदा बढै।

ई  तीन बेरि प्रक्रिया कएल जाइत अछि। अन्तमे पयर पर लागल सिन्दूर-पिटार पोछि देल जाइत अछि आ भाइक माथमे सिन्दूरक ठोप कए देल जाइत अछि।

भरदुतियाक अरिपन
भरदुतियाक अरिपन

बहिन अथवा भाइ मे सँ जे छोट रहैत छथि से दोसर कें गोड़ लगैत छथिन्ह।

एकर बाद भाई कें यथास्थान घरमे बैसाए डालीमे केरा, मखान, मेवा, फल, मधुर आदि बिगजी (भेषजी) क रूप मे दैत छथिन जाहिमे अंकुरी अवश्य रहैत अछि। अंकुरी सामान्यतः केरावक होइत अछि, मुदा कतहु कतहु बदामक सेहो व्यवहार सुनबामे आएल अछि। ई अन्न थीक जे बहिन अपना हाथसँ भाइक हाथमे दैत छथि।

एकर बाद सुविधानुसार भाइ बहिनक घरमे ठाम अन्न खाइत छथि आ अपना दिस सँ आनल सनेस वस्त्र, आभूषण अथवा नगदी रुपैया दैत छथिन्ह।

One thought on “Procedure of  Bhai dooj in Mithila

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!