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Akbar’s Birth : fake matter of spreading disgust.

अकबर के जन्म की कथा

आपसी घृणा फैलाने के लिए लोग किस हद तक इतिहास के साथ छेडछाड कर सकते हैं, इसका एक ताजा उदाहरण है अकबर के जन्म की कथा।

Dainik Bharat नामक एक ब्लाग पर एक पोस्ट आया है जिसका स्क्रीन शॉट देख सकते हैं-

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आज कुछ दिनों से यह नफरत फैलायी जी रही है कि शेरशाह ने हुमाँयू को 1540 ई.मे हिन्दुस्तान से खदेड दिया ओर वह पाँच साल तक ईरान मे रहा। अकबर का जन्म 1542 ई. मे भारत में हुआ। इस कथन से अकबर को हुमाँयू का बेटा मानने के लिए ये लोग तैयार नहीं है। यह केवल आपसी सद्भाव को मिटाकर घृणा फैलाने की बात है, जो किसी भी देश के लिए ठीक नहीं है।

साथ ही इसके लिए वामपन्थ को दोष दिया जा रहा है कि उन्होंने अकबर को हुमायूँ का बेटा मानकर गलत किया है।

मुझे किसी भी पन्थ से कोई लेना देना नहीं है, लेकिन इतिहास के साथ छेडछाड कर नयी पीढी के मन मे घृणा भरने के षड्यंत्र से दुःखी हूँ।

मुझे यह भी तो देखना होगा कि भारत में वामपन्थ के जन्म होने से पहले इतिहासकारों ने क्या लिखा है। इसके लिए हमने 1858 ई. से पहले छपी पुस्तकों का सहारा लिया। उन पुस्तकों में स्पष्ट लिखा हुआ है कि हुमायूँ 1542 ई. मे भारत से पर्शिया के लिए रवाना हुआ। वह 1541 ई. में अमरकोट पहुँचा। अमरकोट के किला के निकट उसने अपना शिविर लगाया। उसके खाने की रसद समाप्त हो चुकी थी। वह भूखा था। उन दिनों अमरकोट मे राजा राणा प्रसाद का शासन था। हुमाँयू ने उनके पास अपनी खबर भिजबायी तो राजा ने उसे अपने यहाँ शरण दी थी, जहाँ वह लगभग 1 साल रहा। उसी दरम्यान अकबर का जन्म हुआ।

यहाँ हमें राजा राणा प्रसाद की गौरव गाथा गाने का पूरा हक है, पर आधी-अधूरी जानकारी के कारण लोगों में नफरत फैलाने का हक हमारी संस्कृति हमें नहीं देता।

हम सबसे पहले अमरकोट के बारे में जानें। इसके सम्बन्ध में हम The Penny Cyclopaedia of the Society for the Diffussion of Useful Knowledge, Volume 1, Charles Knight, 1833 को यहाँ उद्धृत करते हैं।

1833 ई. मे कोई वामपन्थ भारत में नहीं था। इस्ट इंडिया कम्पनी की सरकार थी जो अन्तरराष्ट्रीय स्तर की पुस्तक में एक शहर के बारे में यह जानकरी दी। इसके लेखक को न तो किसी राजनीति से मतलब था न ही किसी समुदाय को बदनाम या महिमामण्डित करने से फायदा था।

AMERKOTE, a town near the eastern frontier of Sinde, and about eighty-five miles to the eastward of Hyderabad, in that province. It is in 23° 20′ north lat., and 69° 49′ east long. This town is celebrated as having been the birthplace of the Emperor Akbar, when, in 1541, his father Humayun was driven from Hindostan by Shere Khan, the regent of Bahar. Amerkote was once the capital of an independent district in the south-eastern quarter of Mooltan, under which latter name was formerly comprehended the whole of Sinde; in 1813 it was captured by the Ameers of Sinde. The country by which it is surrounded being barren, yields nothing to the public revenue, which is derived from duties on merchandise, and exactions from travellers who pass through. (Mill’s History of British India; and Hamilton’s East India Gazetteer.) (p.449)


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