Remains of an old Shiva temple at Lohna village

लोहना गाँव में प्राचीन शिवमन्दिर के अवशेष

-भवनाथ झा

मधुबनी जिला के झंझारपुर प्रखण्ड के अन्तर्गत लोहना गाँव में प्राचीन शिवलिंग एवं मन्दिर के अवशेष बिखरे पडे हैं। यह स्थान लखनदेई नदी की प्राचीन धारा के पूर्वी तट पर अवस्थित एक पुराने टीले पर है। वर्तमान में यहाँ एक नीम का पेड है, जिसके नीचे लोक देवता सलहेस का प्राचीन स्थान है। यह स्थान मकसूदन बाबा के थान के नाम से प्रख्यात है।

Salhesh Sthan At Lohna

इसके पूरब में एक तालाब विशाल तालाब है। इस तालाब के पश्चिम-दक्षिण कोण पर यह स्थान है। इसी तालाब के पूर्वी छोर पर वर्तमान में भैरवस्थान थाना का मुख्यालय अवस्थित है। यह स्थान East-west corridor NH. 57 पर दरभंगा से लगभग 45 कि.मी. पर अवस्थित है। विख्यात विदेश्वर मन्दिर से यह स्थान लगभग 500 मीटर की दूरी पर उत्तर-पश्चिम कोण में है।

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यहाँ बलुई पत्थर के चार अवशेष जमीन पर पडे हुए हैं, जिनमें से एक शिवलिंग के रूप में चिह्नित किया गया है।

चित्र संख्या 1. शिवलिंग का अवशेष
चित्र संख्या 1. शिवलिंग का अवशेष

 

चित्र संख्या  2. शिवलिंग के अर्घा से जल निकासी की प्रणाली, इसे शिवसूत्र कहा जाता है।
चित्र संख्या3. मन्दिर के शिखर की छत।
चित्र संख्या 3. मन्दिर के शिखर की छत।
चित्र संख्या  4. अज्ञात पत्थर। शायद यह भी दूसरा शिवलिंग हो अथवा मन्दिर के ऊपर आमलक की तरह इसका व्यवहार किया गया हो।

चित्र संख्या 1 के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि यह नागर शैली का शिवलिंग है, जिसमें सबसे नीचे चौकोर है, इसके ऊपर अष्टफलक है तथा सबसे ऊपर गोलाकार है।

शिवलिंग की तीनों मेखलाएँ तथा अर्घा ( जलधरी का स्थान) के लिए शिवसूत्र-मेखला

इस प्रकार का शिवलिंग गुप्तकाल में बनाने की परम्परा थी, जिसका विवरण वराहमिहिर ने बृहत्संहिता में दिया है। टी. गोपीनाथ राव ने अपनी पुस्तक Elements of Hindu Iconography में इस प्रकार के शिवलिंग का विस्तृत विवेचन किया है।

विभिन्न प्रकार के शिवलिंग की संरचना

लगभग आठवीं शती के बाद के जो शिवलिंग उपलब्ध होते हैं, उनमें तीनों मेखलाओं में अन्तर है। विष्णु-मेखला तथा ब्रह्म-मेखला छोटी होती गयी है। यहाँ तीनों मेखला समान ऊचाई की है, अतः इसे 7वीं शती के पूर्व का माना जाना चाहिए।

शिवलिंग के इस स्वरूप के अनुसार इसकी स्थापना के समय ब्रह्म-मेखला एवं विष्णु मेखला भूमि के अन्दर रखी जाती है। शिवमेखला में शिवसूत्र-मेखला का भाग जलधरी (अर्घा) के अन्दर रहता है। इस शिवलिंग में यह अंश स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इसकी मोटाई के बराबर मोटाई का शिलापट्ट अर्घा के रूप में रहा होगा। इसकी शैली से प्रतीत होता है कि यहाँ नागर शैली का चौकोर अर्घा रहा होगा। इस प्रकार का चौकोर अर्घा बिहार में गुप्तकाल एवं उत्तर गुप्तकाल में पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। यहाँ उदाहरण के लिए भभूआ के मुण्डेश्वरी मन्दिर परिसर का यह खण्डित अर्घा देखा जा सकता है।

A broken Argha from Mundeshvari Temple near Bhabhua

इस प्रकार इस शिवमन्दिर में विशाल शिवलिंग का अस्तित्व स्पष्ट होता है।

यहाँ चित्र संख्या 3 में जो शिलापट्ट दिखाया गया है, वह मन्दिर के शिखर की छत है। इसकी लंबाई-चौडाई से स्पष्ट है कि यहाँ नागर शैली का मन्दिर था। इस शैली में मन्दिर का शिखर का आयाम चारों ओर से घटता जाता है और सबसे ऊपर में आमलक के नीचे एक छोटी-सी सपाट पट्टिका छत के रूप में लगा दी जाती है। इस छोटी छत के अन्दर का अलंकृत भाग यहाँ आज भी उपलब्ध है।  

वर्तमान में स्थानीय लोगों द्वारा इसकी वास्तविक पहचान न होने के कारण इसे किसी पहलवान का सोंटा मान लिया गया गया है।

इसी लोहना गाँव के मैथिली एवं हिन्दी के साहित्यकार श्री शैलेन्द्र आनन्द ने सूचना दी कि यहाँ अवस्थित तालाब गोसाईं पोखरि के नाम से विख्यात है। परम्परा है कि आज से लगभग 1000 वर्ष पूर्व विश्वेश्वर झा नामक व्यक्ति इस गाँव में आये थे, जिन्होंने अनेक मन्दिरों, कूपों और तालाबों का निर्माण कराया था। उन्हें लोग “तिलका गोसांई” कहा करते थे अतः इस तालाब का नाम भी गोसाँई पोखरि पड गया। यहाँ के अवशेषों के सम्बन्ध में धारणा है कि यह हनुमानजी का सोंटा है, जिससे गाँव की रक्षा होती रहीहै, तथा जल प्रणाली को लोग कमला माई का धार कहते रहे हैं।

Rakesh Kumar

Rakesh kumar

(A freelancer artist at Delhi)

Date of Birth -2nd  January 1989  

Father’s name : Shri   Bhavanath Jha

Present address : C/O Bhavanath Jha, Publication incharge,       Mahavir Mandir Publication, Patna (Bihar)- 800001

Contact no. 8972595783, 9709675349

Email id: rakeshkumar.artist@gmail.com

Marital status – Unmarried 

Sex – Male 

Nationality- Indian

Permanent address- Village & PO – Hatadh Rupouli, Via- Jhanjharpur, Dist. – Madhubani, Bihar-847404

Education

Experience

  • Working as an Art and Craft Teacher, THE FABINDIA SCHOOL, Bali, Rajasthan.  From April 2016 – continued.
  • Exhibitions
  • Young Santiniketan Artist’s Exhibition, SSVAD– 2015
  • 47th Annual Exhibition, Birla Academy Of Art & Culture, Kolkata- 2014
  • Kala Bhavana Art Exhibition at GORKI SADAN, Kolkata- 2014
  • College Annual Exhibition at College Of Arts & Craft, Patna- 2009-2013

Participations

  • Visual art performance in Patna & Santiniketan 2016
  • Mother Earth National Visual Art Camp Organised by Yugantar Art, Craft & Culture Foundation, Ranchi-2015
  • International Workshop On Black- House: Art & Architecture Organised by Kala Bhavana, Visva- Bharti, Santiniketan- 2015
  • Art workshop organised by dept. Of Fine Arts, Andhra University-2014
  • National workshop on glass sculpture Organized by Silpa- Sadan, Visva- Bharti,  Santiniketan.
  • ‘Samhita’- National level Workshop Cum Seminar Organized by College Of Art, New Delhi- 2012
  • Sand Sculpture competition, Patna- 2012
  • One Day Performance Art workshop, at SARAI, New Delhi-2011
  • Performance Art Workshop By ‘Antaryatra’ , Patna-2011
  • Clay modeling competition by CMS VATAVARAN, Patna- 2011

Awards

  • Award for best Sculpture, College Annual Exhibition , College Of Arts & Crafts, Patna- 2011, 2012 & 2013
  • Award for best Photography, College Annual Exhibition, College of Arts & Crafts, Patna-, 2012 & 2013

Grant

  • Grant for Research through Artist Welfare Fund By Dept. Of Art, Culture & Youth. By Govt. of Bihar – 2015

Research

  • Submitted Dissertation work in Master’s Programme- “ Mithila Ki Lok Moortikala Ka Vivechanatmak Adhayayana” ( Analytical Study Of Folk Sculpture Of Mithila)- 2015

Other Experiences

  • Worked as assistant artist in Art studio, Mahabalipuram, Tamilnadu
  • Worked as an Art Director in many Hindi and Maithili Play Publication Design
  • Making Public Sculpture and various forms of Art
  • Photography
  • Video-Photography
  • Video editing

Language KnownMaithili, Hindi, English, Bangla, Magahi, Bhojpuri

Hobbies- Reading books, Composing Poem, playing chess, Swimming


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