Mithila Bharati, a research journal on Mithila vol. IV, 2017

Mithila Bharati
Bilingual Quarterly Research Referral Journal
Published by
Maithili Sahitya Sansthan
B-402, Shri Ram Kunja Apartment, Road No.-4,
Mahesh Nagar, P.O.- Keshri Nagar, Patna-800024.
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Web : www.maithilisahityasansthan.org
Editors
Dr. Shiva Kumar Mishra
Shri Bhairab Lal Das
© Maithili Sahitya Sansthan
Year : 2017
ISSN : 2349-834X

List of Contents] volume 4, 2017

  1. प्रोफसर उपेन्द्र ठाकुर: व्यक्तित्व ओ कृतित्व -शिव कुमार मिश्र
  2. प्रोफेसर उपेन्द्र ठाकुर सन दोसर होअए से असम्भव -पद्मश्री उषा किरण खान
  3. हमर बाबूजी स्व. उपेन्द्र ठाकुर -कल्पना झा
  4. हमर परम गुरू प्रोफेसर उपेन्द्र ठाकुर -मो. सईद आलम
  5. Publications and Other Academic Activities of Professor Upendra Thakur Shiva Kumar Mishra
  6.  मिथिलाक नऽव पुरातात्विक उपलब्धि शिवकुमार मिश्र
  7. मिथिलाक किछु पुरास्थलक भ्रमण विदेशी कलामर्मज्ञक संग -सुशान्त कुमार
  8. चन्दाझाक मिथिला – इतिहास ओ पुरातत्व चिन्तन -शंकरदेव झा
  9. मिथिलाक्षरक विकास- आचार्य परमानन्दन शास्त्री
  10. मधेशी आन्दोलन आ नेपालक राजनीतिः ऐतिहासिक सन्दर्भ -रत्नेश्वर मिश्र
  11. तमाकू: व्यापार, कृषि, लगान ओ रैयत (सरैसा परगना, तिरहुतक विशेष संदर्भमे) अवनीन्द्र कुमार झा
  12. वैद्यनाथधामक दण्डी बम- एक सामाजिक अध्ययन भैरव लाल दास
  13. A Newly Discovered Brahmå Image from Vaishali, Bihar Jalaj Kumar Tiwari
  14. Report on a Brief Tour of North Bihar (Mithilå), January 2017 Rob Linrothe
  15.  Art History of Mithilå : Some Observations Umesh Kumar Singh
  16. Mithilå in Dandi : Myth of Upahåra Varmå S.N. Arya
  17. Contributions of Maithila Scholars to the Formation of Gayå-shråddha Procedure: Focusing on Extra Offerings Called Shodashikarma  Tomoka MUSHIGA
  18.  Maithili and the Politics of Identity Sneha Jha
  19. Making Sense of a Quarrel: Lakshmishwar Singh and Rameshwar Sing of Darbhanga Raj Pankaj Kumar Jha
  1. पुस्तक समीक्षा
  2. A letter to Pt. Govind Jha from Dr. Ramawatar Yadav on a article published in Mithilå Bhåratë, Vol. 3
  3. पुरास्थलक सर्वेक्षण प्रतिवेदन
  4. मिथिला मैथिली
  5. मिथिला भारतीक नवांक मे पूर्व प्रकाशित आलेखक सूची
  6. चित्रावली

 

Pandit Gananath Jha Rachanavali, edited by Prof. Yashodanath Jha

पुस्तक जे पढल

पण्डित गणनाथ झा रचनावली 

पुस्तकक नाम- पण्डित गणनाथ झा रचनावली सम्पादक- प्रो. यशोदानाथ झा  प्रकाशक- श्री यशोदानाथ झा, आनन्द कुटीर, पाहीटोल, पो. सरिसब-पाही, मधुबनी-847424 (बिहार)। प्रकाशन वर्ष- 2017 ई., प्राप्तिस्थान- उपरिवत्। मूल्य– 200.00. मुद्रक- एकेडमी प्रेस, 602, दारागंज, इलाहाबाद। पृष्ठ संख्या– 278।. सजिल्द।

कवि परिचय- मिथिलाक वर्तमान मधुबनी जिलाक अन्तर्गत सरिसब-पाही गाममे पलिवार महिसी मूलक श्रोत्रियवंशक पं. धरानाथझा कें पाँच गोट पुत्ररत्न भलथिन्ह (1) विन्ध्यनाथ झा (2) गणनाथ झा (3) डा. सर गंगानाथ झा (4) विजयनाथ झा (5) वैद्यनाथ झा। एहिमे गणनाथ झाक जन्म 1870 ई.मे भेल रहय। विस्तृत परिचय एहि ग्रन्थमे देल गेल अछि।

  • विवेच्य ग्रन्थमे म.म. डा. सर गंगानाथ झा द्वारा संकलित आ प्रकाशित गणनाथ-पदावली तथा विन्ध्यनाथ पदावली कें हुनक भूमिकाक संग अविकल रूपसँ संकलित कएल गेल अछि। एक पहिल प्रकाशन 1345 साल अर्थात् 1937 ई.मे भेल छल।
  • एकर अतिरिक्त गंगानाथ झा केन्द्रीय विद्यापीठ, इलाहाबाद मे पं. गणनाथ झाक किछु रचनाक मिथिलाक्षरमे हुनकहि हाथक लिखल पाण्डुलिपि सुरक्षित अछि। वर्तमान प्रकाशक डा. यशोदानाथ झा द्वारा संपादित ओहो रचना एतए संकलित कएल गेल अछि। संगहि वर्तमान प्रकाशक कें पं. गणनाथ झाक रचनाक खर्रा लेख अर्थात् रफ कापी प्रो. (डा.) विद्यानाथ मिश्रक सौजन्यसँ प्राप्त भेलनि, जे अत्यन्त जीर्ण भए गेल छल। ओहिमेसँ किछुए कविता उतारल जा सकल। ओकरो संपादित रूप एतए संकलित अछि।
  • संगहिं पं. गणनाथ झा द्वारा 1912 ई. मे मैथिली भाषामे अनूदित ऋग्वेद-संहिताक आरम्भिक भाग डा. यशादानाथ झाक संपादन मे जिज्ञासा पत्रिका, तन्त्रवती गीता भन, मैथिली शोध एकांश, राँटी, मधुबनी, अंक 1, जनवरी-जून-1995 .मे प्रकाशित भेल छल ओकरो संकलन एतए कएल गेल अछि।
  • एहिना पं. गणनाथ झाक श्यामा-रूपक एवं महाभारतक आदिपर्वक अनुवाद प्रथम बेर एतए संपादित आ प्रकाशित कएल गेल अछि। एकर अतिरिक्त किछु संबद्ध पत्र आ आलेख सेहो एतए संकलित अछि जे मिथिलाक तन्त्रसाधनाक वास्तविक स्वरूप पर प्रकाश दैत अछि।

ई पुस्तक पं. गणनाथ झा तथा पं. विन्ध्यनाथ झाक प्रकाशित आ अप्रकाशित रचनासभक पूर्ण आ प्रामाणिक संस्करण थीक जकर श्रेय डा. यशोदानाथ झाकें छनि। आदिमे “स्थितधी गणनाथ” शीर्षकसँ एक डा. यशोदानाथ झाक विस्तृत आलेख अछि जाहिमे दूनू लेखकक व्यक्तित्व आ कृतित्व पर गम्भीर व्याख्यान अछि। एकर भाषाक लालित्य आ गाम्भीर्य आकर्षक अछि। हिन्दी मे हजारीप्रसाद द्विवेदीक शैली एतए मैथिलीमे हमरालोकनिकें भेटैत अछि।

एहिमे संकलित रचना सभक सूची एना अछि-

पण्डित गणनाथ झा

  • पदावली भाग
    • मैथिली पद- कुल 32 गीत जाहिमे देवीपद, समदाउनि, चैत, समदाउनि विजयदशमीक, भगवतीक, काशीमे श्रीताराक धातुविग्रह प्रतिमा अयलापर, श्रीक शयनक, वेरू पहर उठएबाक, सोहर, देशी, कलशस्थापन दिनुक, समदाउनि, लगनी, आसावरी सिन्दूरा गीतक संकलन अछि।
    • मैथिली तथा हिन्दी- एहि अंशमे देव देवी पद, होरी, रसिया, पहाडी आदि रागक गीत संकलित अछि, जाहिमे श्रीराम, शिव, देवी आदिक विनती संकलित अछि।
    • मैथिली शृंगार गीत- एहिमे लगनी एवं तिरहुत रागमे 13 गोट गीत अछि।
    • हिन्दी- एहिमे भगवती एवं श्रीकृष्णक कुल 40 गीतक संकलन अछि जकर अंतिम गीतमे कवि अपन माता-पिताक नामोल्लेख करैत छथि।
    • गणनाथ झाक खर्रा कापीसँ उतार गेल 3 पद, जाहिमे तेसर खण्डित अछि।
  • महाभारत आदिपर्वक मैथिली गद्यानुवाद- 1907 ई. मे कएल गेल छल। एहिमे 20म शतीक आदिमे मैथिलीगद्यक स्वरूप स्पष्ट होइत अछि।
  • ऋग्वेद-संहिताक मिथिलाभाषामध्य अनुवाद- 1912 ई.सँ आरम्भ भएल छल। एहिमे प्रथम मण्डलक 22 सूक्त धरि गद्यानुवाद अछि। एहिमे 20म शतीक आदिमे मैथिलीगद्यक स्वरूप स्पष्ट होइत अछि।
  • श्यामारूपक (ईहामृग)
  • शिवपार्वती नाटिका- एकर प्रथम प्रकाशन श्रीमती आद्याझाक संपादनमे हिन्दी प्रचार पुस्तकालय वाराणसीसँ 1959 ई.मे भेल छल।
  • डा. सर गंगानाथ झा प्रसन्नराघव नाटकक भावबोधिनी व्याख्या लिखने छथि, जाहिमे वैयाकरणप्रवर श्रीयदुनन्दन शर्मा टीकाकारक वंश परिचय संस्कृत 36 टा श्लोकमे लिखने छथि। ई अश मूल रूपमे एतए संकलित कएल गेल अछि।

विन्ध्यनाथ झा

  • हिनक कुल 17 पद संकलित अछि।

ई सन्दर्भ-पुस्तक थीक, जे संकलनीय आ पठनीय अछि।

पुस्तक-प्राप्तिक लेल प्रो.. यशोदानाथ झासँ सम्पर्क कए जा सकैत अछि।

Koilakh, written by Hitnath Jha

पुस्तक जे पढल

कोइलख

पुस्तकक नाम- कोइलख। लेखक-सम्पादक- श्री हितनाथ झा। प्रकाशक-प्रियदर्शी प्रकाशन, 217, पाटलीपुत्र कॉलोनी, पटना- 800013. प्रकाशन वर्ष- 2017 ई., प्राप्तिस्थान- (1) श्री हितनाथ झा, जयप्रभा नगर, मारखम कालेज के निकट, बड़कागाँव रोड, हजारीबाग- 825301. मो. 9430743070, ईमेल- hitnathjha@gmail.com (2) प्रो. भीमनाथ झा, छपकी पड़री, (पंचायत भवन से दक्षिण), लक्ष्मीसागर, दरभंगा-846009 (3) जानकी पुस्तक केन्द्र- गोशाला चौक, मधुबनी-847211. मूल्य– 400.00. मुद्रक प्रिंटवेल, टावर, दरभंगा। पृष्ठ संख्या- 210. सजिल्द।


विवेच्य पुस्तक कोइलख गामक सारस्वत परम्पराक इतिहास थीक। एहिमे 39 दिवंगत एवं 6 जीवित व्यक्तिक परिचयक संग हुनक कृतिक सूचना संक्षेपमे देल गेल अछि। आरम्भमे कोइलखक प्रसंग आचार्य सुरेन्द्र झा सुमन एवं प्रो. भीमनाथ झा उद्गार देल गेल अछि। कोइलख मे अवस्थित 7 टा संस्थाक परिचयक संग एक शिवमन्दिर वनखण्डीनाथ महादेव मन्दिरक पुरातात्त्विक महत्त्व पर एक आमन्त्रित आलेख अछि। परिशिष्ट भागमे आचार्य सुरेन्द्र झा सुमन, मोहन भारद्वाज, पं. बलदेव मिश्र ज्यौतिषी, प्रो. भीमनाथ झा, प्रो. विद्य़ापति ठाकुर एवं डा. दमन कुमार झाक एक एक आलेख अछि।

हमरा जनैत पुस्तक कें देखबाक दूटा दृष्टि होइत छैक- पहिल जे, जे अछि , से केहन अछि? जे नै छैक तकर चर्चे कोन? लिखबाक लेल तँ बहुत किछु छैक! एखनि एतबे सँ सन्तोष।

मुदा दोसर दृष्टि होइत छैक जे आर की की रहबाक चाही।

स्पष्ट अछि जे पहिल दृष्टि टकसाली समीक्षा थिक, जतए ममत्व नै रहै छैक, दोसरक बेटाक गुण-दोषक विवेचन जकाँ। मुदा दोसर प्रकारक दृष्टि अपन वस्तुकें देखबाक दिशा थीक। 

पहिल प्रकारक दृष्टिमे पुस्तक बड नीक अछि। एहू दृष्टिमे हम कने उमापतिक परिचय पर रुकब। एकटा शुद्धिनिर्णयकार पगौलीमूलक धर्मशास्त्री उमापति छलाह। एकरा फरिछाएब आवश्यक। कारण जे राघवसिंहक कालमे जे उमापति छलाह हुनक लिखाओल एकटा व्यवस्थापत्र हमरा लग अछि। गोकुलनाथक गुरु धर्मशास्त्री उमापति रहथि। आ तखनि शुद्धिनिर्णय सेहो हुनके रचना भए सकैत अछि।

कोइलखक एकटा आर महामहोपाध्याय भैयन शर्मा भेटैत छथि। पद्मानन्दविनोद नाटकमे भराम ग्रामक वासी म.म. मधुसूदन मिश्र लिखैत छथि जे कोइलख गामक वासी भैय्यन झाक दौहित्रक पौत्र लीलानन्द सिंह रहथि आ हुनके दौहित्रक दौहित्र कवि म.म. मधुसूदन मिश्र रहथि।

पद्मानन्दविनोद नाटकम्, अंक- 5, पृ. 29

वस्तुतः बनैलीक राजा दुलार सिंहक एक विवाह कोइलखक सरिसब मूलक चतुर्भुज झाक पुत्र भैयन झाक कन्यासँ भेल छल, जनिक पुत्र रहथि राजा सर्वानन्द सिंह आ महाराज वेदानन्द सिंह। हुनका महामहोपाध्याय कहल गेल अछि। ओहि भैयन झाक अन्वेषण होएबाक चाही। हुनक रचना सेहो हुनक वंशज लोकनिक घरमे भेटि सकैत अछि।

एखनि हम आशा करैत करैत छी जे एतबा तँ संकलित भए गेल आरो काज होइत रहत।

दोसर दृष्टिसँ देखला पर किछु निराशा हाथ लगैत अछि। पुस्तकक शीर्षक थीक- कोइलख। मात्र सारस्वत इतिहास कोनो गामक सम्पूर्णताक द्योतक नै भए सकैत अछि। एक पृष्ठ पर साख्यिकीय सूचना दए देलासँ लेखक कर्तव्य समाप्त नै भए जाइत अछि। जँ पुस्तकक शीर्षक मे सारस्वत इतिहासक संकेत कए देल गेल रहैत तँ उचित होइत। मुदा एतए गामक इतिहास संकेतित अछि। गामक इतिहास-लेखन मे गामक सभ जातिक लोकक विवरण होएबाक चाही। कतेक हलुआइ, कतेक राजमिस्त्री, कतेक गवैया आर आर गुनी लोकनि, अपन अपन काजमे विशिष्ट लोक सभ जातिमे भेटि जेताह। सभटाक सर्वेक्षणक अपेक्षा छैक। कोन कोन मूलक ब्राह्मण एतए रहैत छथि हुनक सामाजिक आ ऐतिहासिक आ पुरातात्त्विक परिप्रेक्ष्यमे कोइलखकें देखल जएबाक चाही। गाममे कोन कोन पूज्य थान सभ अछि, गाममे कोन कोन नामसँ डीह अछि, सभटाक सर्वेक्षण अपेक्षित छैक। कोइलखक बाधमे सेहो कतेको डीह होएत। कमलाक एकटा धाराक कछेरमे बसल गाम, जतए सँ पालकालक अवशेष सभ भेटैत अछि, ओहि डीह सभक नाम संकलित रहितैक।

जें कि एकर नामकरण सोझे “कोइलख” कएल गेल अछि तें एतेक रास अपेक्षा अछि, अव्याप्ति दोष आबि जाइत अछि।

अस्तु, जे अछि से नीक अछि। मानि लिय जे ई कोइलखक सारस्वत इतिहास थीक। तखनि पुस्तक देखि मोन आह्लादित भए जाइत अछि। एकर पठनीयता छैक। सुन्दर छपाइ आकर्षक अछि।