Brahmi PublicationArt, Culture and History of Mithila
मिथिलाक इतिहास, संस्कृति, लिपि एवं कला पर शोधपरक आलेखक प्रकाशन ।
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History of Mithila

Some newly found original sources of the History of Mithila

 

अंधराठाढीसँ प्राप्त तीन शिलालेख

अंधराठाढी गाम कें मिथिलाक कर्णाट साम्राज्यक पहिल राजधानी होएबाक गौरव प्राप्त छैक। एतय कमलादित्य स्थान सँ श्रीधरक विष्णुमूर्ति अभिलेख, मगरधज जोगी अभिलेख आ तारामूर्ति अभिलेख ई तीन टा अंतर्लेख एखनि धरि प्राप्त भेल अछि।.....Read more>>

 

प्राचीन मिथिलापुरीक स्थान-निर्धारण

मिथिलापुरी राजा जनकक राजधानी छल। एतय सीतामाताक जन्म भेल रहए। बादमे मिथिला शब्द सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्रक लेल व्यवहारमे आबि गेल। मुदा मिथिला नगर कतए छल से आइ धरि निर्धारित नहिं भए सकल। लगभग 17म शतीक बाद जनकपुर एकटा धार्मिक स्थानक रूपमे विख्यात भेल आ एतय विगत शती धरि महल सभ बनैत रहल। 19म शतीसँ जनकपुरधाम मिथिला नगरीक रूपमे आस्थाक केन्द्र रहल। मुदा ऐतिहासिक दृष्टिसँ मिथिला नगरीक अन्वेषण नहि भए सकल। किछु गोटे बलिराजगढक प्राचीनता पर मुग्ध भए ओकरे मिथिलाक मूल नगर घोषित करबाक प्रयास कएलनि। एही विषय पर फेरसँ विभिन्न प्रमाणक संग एतय विवेचन भेल अछि........read more ..>>

 

Simraun Garh

सिमरौनगढ़ से प्राप्त नवीन खण्डित शिलालेख

दिनांक 15 मई, 2018 ई.को सोसल मीडिया फेसबुक के माध्यम से श्री डी. के. सिंह से सूचना दी कि समरौन गढ कोल्डस्टोर से पश्चिम स्थित तालाब की खुदाई के दौरान एक शिलालेख का टुकडा मिला है। उन्होंने इसी पोस्ट के माध्यम से लोगों से इसे पढने का भी आग्रह किया। यह अभिलेख तीन ओर से खण्डित है, केवल नीचे का भाग सुरक्षित है। इस खण्डित शिलालेख की लंबाई एवं चौड़ाई क्रमशः 29.5 से.मी. तथा 15 से.मी.है। Readmore>>

 

fragments at Lohna

लोहना गाँव के पुरातात्त्विक अवशेष

यहाँ प्राचीन लखनदेई नदी के किनारे एक पुराने डीह की शृंखला है। नदी से लगभग 100 मीटर पश्चिम में उत्तर से दक्षिण अनेक छोटे-छोटे टीलों का यह समूह है। उत्तर से दक्षिण इसकी लंबाई लगभग 300 मीटर है, इसके बाद लोगों ने इसी शृंखला में अपना घर बना लिया है। ग्रामीण बताते हैं कि आज से लगभग 60 वर्ष पूर्व यह 15 फीट के लगभग ऊँचा था, किन्तु वर्तमान में नदी की ओर से इसकी ऊँचाई 10 फीट के लगभग बची है।...Readmore>>

 
 
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