Brahmi PublicationArt, Culture and History of Mithila
मिथिलाक इतिहास, संस्कृति, कर्मकाण्ड, लिपि एवं कला पर शोधपरक आलेखक प्रकाशन ।
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Rituals of Mithila

मिथिलाक पाबनि-तिहार आ पूजा-पाठक मूल-विवरण

आधुनिक कालमे बाजारवाद, संचार-माध्यम आ अन्य अनेक कारणसँ मिथिलाक अपन परम्परा सभ विलुप्त होएबाक स्थितिमे आबि रहल अछि। आब सभ टी.वी.क शो देखि पूजा-पाठ आ व्रत करबाक लेल उत्सुक रहैत छथि। जँ से नै, तँ गीता-प्रेस सँ प्रकाशित पुस्तक पढि-देखि ओकरा अनुसार कार्य करैत छथि। गीताप्रेसक पुस्तक मिथिलाक परम्परा नै थीक। हमरालोकनि कें अपन अस्तित्व बनएबाक लेल ओकर अंधानुकरण छोड़ए पडत। एम्हर मिथिलाक परम्पराक पुस्तक सभठाम सुलभसँ उपलब्ध नै अछि। तें हम एतय मिथिलाक परम्परा यथासाध्य सर्वजनसुलभ करबाक लेल एतय प्रस्तुत छी। क्रमशः कर्मकाण्ड आ पाबनि-तिहारक विवरण एतए उपलब्ध होएत।

 

दूर्वाक्षत मन्त्र

मिथिलामे दूर्वाक्षत आशीर्वादक कर्मकाण्ड थीक। दूबि जेना चतरब, उन्नति करब सभसँ पैघ आशीर्वाद भेल। वेद सेहो दूबिक चतरबाक प्रवृत्तिक प्रशंसा करैत अछि। Read more>>

 

दुर्गापूजामे हवनक शास्त्रीय विधि

दुर्गापूजाक अन्तमे नवमी दिन हवन कबाक विधान मैथिल परम्परा मे कएल गेल अछि। एकर विधान म.म. परमेश्वर झा सेहो लिखने छथि। संगहविद्यापति ठाकुरक दुर्गाभक्तितरङ्गिणीमे सेहो देल अछि। बंगालक परम्परामे रघुनन्दन भट्टाचार्य सेहो स्मृतितत्त्वक अन्तर्गत दुर्गार्चनपद्धति मे उल्लेख कएने छथि।Read more>>

 

दुर्गाक वाहनक अनुसार वर्षफलक गणना (हिन्दीमे)

मिथिला आ मगधक क्षेत्रमे दुर्गापूजामे कलशस्थापना आ दिजयादशमीक दिनक आधार पर वर्षफलक भविष्यवाणी करबाक परम्परा रहल अछि। यद्यापि एकर परम्परा हमरा वेसी पुरान नै भेटल अछि तैयो लोकमे एकर बड मान्यता छैक। बंगालमे महालयाक दिनसँ एकर गणना होइत अछि....Read more..>>>

 

छठि पूजाक संस्कृत कथा

मिथिलामे छठिपूजाक संस्कृतमे कथा वर्षकृत्य सभमे देल गेल अछि। आब संस्कृतक प्रचलन कम भए गेल तें लोक सभकें कथा सुनबाक लेल एसुविधा लोइत छनि। एतय ध्वन्यंकन सेहो भेटत।...........Read more>>

 

चतुर्थीचन्द्रपूजा (चौरचन) पाबनि

चौठचन्द्र मिथिलाक विशिष्ट पर्व थीक जे आनठाम कतहु नहिं होइत अछि। एहिमे पकमान आ दहीक विशेष महत्त्व अछि। सन्तानक उन्नतिक कामनासँ चन्द्रमाक आराधना एहि दिन कएल जाइत अछि। मिथिलामे प्रख्यात ज्योतिषी हेमाङ्गद ठाकुर ई पूजा आरम्भ कएल से साक्ष्य सभसँ सिद्ध होइत अछि। एकर विवरण नीचाँ देल गेल अछि।Readmore>>

 

कोजागरा

आश्विन पूर्णिमा कें कोजागराक राति लक्ष्मीपूजाक लेल प्रसिद्ध अछि। दोसर दिस नवविवाहित दम्पतीक चुमाओनक लेएहि रातिक सास्कृतिक महत्त्व छैक। एतए लक्ष्मीपूजाक दृष्टसँ एहि रातिक कर्तव्यक शास्त्रीय विधि देल गेल अछि। मिथिलाक कर्मकाण्डक परम्परामे लक्ष्मीपूजा पर बहुत सामग्री उपलब्ध छैक। म.म. रत्नपाणि सेहो एकर विस्तृत कर्मकाण्ड देने छथि। Read more>>

 

जितिया व्रतकथा

जितिया पाबनि वास्तवमे जीवितपुत्रिका अथवा जीवपुत्रिका व्रत थीक। एकरे जिउतिया आ जितिया कहल जाइत अछि। आश्विन मासक कृष्ण पक्षक अष्टमी तिथि कें ई व्रत होइत अछि। कहल गेल अछि जे जे नारी ई व्रत कए शालिवाहन राजाक पुत्र जीमूतवाहनक पूजा करैत छथि, हुनक सौभाग्य अटल रहैत छनि आ सन्तानक उन्नति होइत छनि। Read more>

 
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