Saral Chikitsa by Dr. Binodanad Jha “Vishwabandhu”

सरल चिकित्सा ( मैथिली)

लेखक- डॉ. बिनोदानन्द झा विश्वबन्धु

वर्ष: 2017

प्रकाशक- बिनोदानन्द रिसर्च सेंटर फॉर वैदिक एस्ट्रोलोजी तंत्र एण्ड आर्ट

सर्वाधिकार सुरक्षित

प्राप्ति स्थान-

1 आश्रम, हाउस न- 038/129

एस- पी- कोठी के पश्चिम, श्रीनगर हाता, पूर्णियाँ, बिहार

2 श्री पी के झा फ्लैट न0-02, तुलसी बिहार, प्लौट न0-55,

सेक्टर-19, खारधर, नवी मुम्बई-410210

3 श्री पी के झा

आफिसर्स फ्लैट न0-304, नेशनल इस्टिच्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलोजी

पटना-800001

दूरभाष- 09931595506, 09869844756, 09473129595, 8877576842

पी पी बन्दना झा

Email:   bnjha1936@yahoo.co.in, pkjhaji@yahoo.co.in, Pkjhaji@gmail.com

Web:    www.brcindia.blogspot.co.in

सहयोग दान राशि- 100/

मुद्रक- वातायन मीडिया एण्ड पब्लिकेशन्स, प्रा. लि., फ्रेजर रोड पटना- 800001

फोन: 0612-2222920, मो- 9431040914

(मैथिलीमे तकनीकी विषय पर पुस्तक लेखनक क्षेत्र मे ई पुस्तक महत्त्वपूर्ण अछि। होम्योपैथी पद्धतिसँ चिकित्साविषयक ई पुस्तक मैथिली भाषा साहित्यक लेल लेखकक अनुपम योगदान अछि।)

लेखकक प्राक्कथन

हमरा होम्योपैथी दवाइपर विश्वास एकदम नइं छल। 1962मे कटिहारमे हमरा पेट खराब भ गेल तँ एलोपैथीमे क्लोरोस्टेप लेबा लजा रहल रही। श्री मिस्टरबाबूक संग छला। ओ होम्योपैथीक डाॅक्टर कत गेला ओ डाॅक्टर हमरा एक खुराक दवाइ आग्रह कऽ खुआ देलनि। ओ दवाइ रामबाण जेना काज केलक आर हमरा पेट ठीक भऽ गेल। होम्योपैथी पर विश्वास जमऽ लागल। हम ओकर पुस्तक खरीदलपढाइ कऽ कऽ डिग्रीयो लेलहुँ दवाइ रखनाइ प्रारंभ कऽ देल।आर अपन परिवार तथा निजी लोकक होम्योपैथी सँ इलाजो करऽ लगलौ।

स्वयं माँ द्वारा मंत्र एवं आलामे रहस्य -1980 ई-क दशहरामे अष्टमीक राति छल। हम अपन स्त्रीक संग कामाख्या मन्दिरक पश्चिमी आलयमे एक कोठली भाड़ा पर लश्के साधनामे छलहुँ। हम जप कऽ रहल छलहुँॅ। लगभग 1 बाजे आँखि बन्द कऽ माॅ कामाख्याक ध्यानमे मग्न छलहुँ। हमर आँंिखक पलक अचानक बन्द भऽ गेल किन्तु चेतनाक अनुसार जागल अवस्था छलहुँ। हम स्वयं निर्धारित नहि कए सकैत छलहुँ जे हम सुतल छलहुँकी जागल?

हम देखलियै जे कामाख्या माँक मुख्य मन्दिर सँ लाल वस्त्र धारण कएने एक महिला हमर दिस बढ़ि रहल छलीहपहिल कोठली पार कए दोसर कोठलीमे पार कए आलयमे आवि गेलीहफेर आलय सँ बाहर पश्चिमी गेट सँ पार कऽ हमर कोठलीमे सीढ़ी पर चढ़इ़त आवि गेलीह। हम निश्चय नहि कए पाबि रहल छलहुँ जे ई के थिकीहहमर लग आवि कए हमरा एक मंत्रक जप करबाक आदेश देलनि आर एक आला हमर हाथमे द क जाहि रास्ता सँ आएल छलीह ओही रस्ते सँ धीरे-धीरे चलइत माँक मूर्तिवला रूपमे जा कए विलीन भ गेलीह। तुरन्त प्रेमा कंे जगौलियनिउठा कऽ कलम मंगवा कऽ मंत्रके लिख लेलहुँ तकर बाद प्रेमा कें सविस्तर घटनाक जानकारी दऽ देलियनि। भिनसर उठि कऽ पहिने गुरुजीके सविस्तर कहलियनिओ प्रसन्न भए बजलाह स्वंय माँ अहाँके अष्टमीक रातिमे मंत्र देने छथिभाग्यशाली छीआब अहाँ कें कोनो गुरु वा अन्य मंत्रक आवश्यकता नइ अछि। तखन आलाक रहस्य हमरा लोकनि के अन्दाज नइ लागल।

तँ हम प्रेमा सँ कहलियनि जे जखन माँ आला देलनिहे तँ अहूमे कोनो रहस्य अवश्य छुपल होएतैक।

कामाख्या मन्दिरक आलयमे कुष्ठक रोगी बहुत भीख मंगैत छलैक। हम सब निश्चय कएलहुँ जे एहि भीखमंगा सबहक कुष्ठक ईलाज करी।

एक पंडाजीक कृपासँ एक कोठली क्लीनिक खोलवा लेऽ भेटि गेल। हम अशोक पेपर मिल के औफिसमे गौहाटीमे कार्य करैत छलहुँडेरा उजान बजारमे भेटल छल। तइयो प्रत्येक रविवारके कामाख्या मन्दिर आवि कऽ कुष्ठक रोगी सबके निःशुल्क ईलाज करैत छलहुँ। काफी यशो भेटलकियैक नइ भेटितेमाँक जे आर्शिवाद संग छल।

दू वर्षक बाद अशोक पेपर मिल बन्द होएबाक कारणे हमरा लोकनि के दरमाहा भुगतान बन्द भऽ गेल। तखन स्मरण आएल जे माँ दू वर्ष पहिनहि अही दिन ले आला हाथमे देने छलीह। तखन आलाक रहस्य हमरा लोकनि के अन्दाज लागल। जोगीधोपा मे क्लीनिक खोलि होम्योपैथीक ईलाज कर लगलहुॅ। माँक महिमा अपरम्पार छनि। पहिने एक मुसलमान भाई एक गलीत कुष्ठक रोगी अनलनि जिनका बी- आर- पी- एल- लाईलाज घोषित कऽ नौकरीसँ सेहो निकालि चुकल छलैकघरवला सेहो घरसँ निकालि देने छलैक। तीन महिनाक ईलाजसँ ओ भला चंगा भऽ गेल। नौकरी पर फेरसँ ओकरा हम पठा देलियै आर फलस्वरूप बी-आर- पी- एल- अस्पताल सँ हमरा चर्म रोगक रेफर्ड केश भेटऽ लागल। दोसर रोगी आसामी छल जकर पैर टीन सँ कटि गेल रहैजहि सँ सम्पूर्ण शरीरमे सेप्टीक भऽ गेल रहै रक्त दूषित भऽ के शरीर मे पीव भरि गेल छलैक। ओकरा गौहाटी अस्पताल सँ भेलोर लऽ रेफर कैल गेल छलैक। जखनि तक पैसाक प्रबन्ध नइं भेल छलैकता तक ओकर स्त्रीक आग्रह पर हम किछु अपन दवाइ प्रारंभ कऽ देलियै। दवाइ रामबाण जेना काज देखौलकै आर ओकरा भेलोर जेबाक आवश्यकता नइं रहलै। तेसर रोगी एक बंगाली जनिका कान लग बड़का टा लोकुमा भ क कान के बन्द क देने छलनि। हम दवाइ देलियनि आर करीब 20 दिनक धीरे-धीरे छेद कऽ शल्य चिकित्सा दवाइये सँ भ गेलै। प्रारंभहि मे ई तीन जातिक लोक मुसलमानआसामी आर बंगालीक सफलतापूर्वक ईलाज सँ हमरा पूरा नाम यश प्रतिष्ठा पैसा भेटय लागल। यावत धरि जोगीघोपा आसाम मे रहलहुं। दरमाहा तँ नइ भेटबाक अभाव अनुभव नै भेल ।

डॉ. बिनोदानन्द झा विश्वबन्धु