रावण-वध किएक?

दुर्गापूजाक संग रावण-वधक की औचित्य? मिथिलाक परम्परा आ शक्ति उपासनाक परम्पराक चर्चा करैत एकटा आलेख।- भवनाथ झा>>>

 
    
  

जितिया व्रतकथा

जितिया पाबनि वास्तवमे जीवितपुत्रिका अथवा जीवपुत्रिका व्रत थीक। एकरे जिउतिया आ जितिया कहल जाइत अछि। आश्विन मासक कृष्ण पक्षक अष्टमी तिथि कें ... Read more>

 
  
 
  

चतुर्थीचन्द्रपूजा (चौरचन) पाबनि

चौठचन्द्र मिथिलाक विशिष्ट पर्व थीक जे आनठाम कतहु नहिं होइत अछि। एहिमे पकमान आ दहीक विशेष महत्त्व अछि। सन्तानक उन्नतिक कामनासँ ... Readmore>>

 
  
 
  

छठि पूजाक संस्कृत कथा

मिथिलामे छठिपूजाक संस्कृतमे कथा वर्षकृत्य सभमे देल गेल अछि। आब संस्कृतक प्रचलन कम भए गेल तें लोक सभकें कथा सुनबाक लेल असुविधा होइत छनि। एतय ध्वन्यंकन सेहो भेटत।...........Read more>>

 
  
 
  

दुर्गाक वाहनक अनुसार वर्षफलक गणना (हिन्दीमे)

मिथिला आ मगधक क्षेत्रमे दुर्गापूजामे कलशस्थापना आ दिजयादशमीक दिनक आधार पर वर्षफलक भविष्यवाणी करबाक परम्परा रहल अछि। यद्यापि एकर परम्परा हमरा वेसी पुरान नै भेटल अछि तैयो लोकमे एकर बड मान्यता छैक। बंगालमे महालयाक दिनसँ एकर गणना होइत अछि....Read more..>>>

 
  
 
  

दुर्गापूजामे हवनक शास्त्रीय विधि

दुर्गापूजाक अन्तमे नवमी दिन हवन करबाक विधान मैथिल परम्परा मे कएल गेल अछि। एकर विधान म.म. परमेश्वर झा सेहो लिखने छथि। संगहि विद्यापति ठाकुरक दुर्गाभक्तितरङ्गिणीमे सेहो देल अछि। बंगालक परम्परामे रघुनन्दन भट्टाचार्य सेहो स्मृतितत्त्वक अन्तर्गत दुर्गार्चनपद्धतिमे उल्लेख कएने छथि।Read more>>

 
  
 
  

दूर्वाक्षत मन्त्र

मिथिलामे दूर्वाक्षत आशीर्वादक कर्मकाण्ड थीक। दूबि जेना चतरब, उन्नति करब सभसँ पैघ आशीर्वाद भेल। वेद सेहो दूबिक चतरबाक प्रवृत्तिक प्रशंसा करैत अछि। Read more>>

 
  
 
  

प्राचीन मिथिला नगरी कहाँ थी? जनकपुर या सीतामढी?

प्राचीन काल में मिथिला एक राजधानी थी, जहाँ राजा जनक का राजमहल था और यहीं सीता माता का जन्म हुआ था। यह राजधानी कहा थी? इस विषय पर जब इतिहास को परखते हैं तो पता चलता है कि मुगलकाल में जिस क्षेत्र को मिहिला परगना कहा गया है, वहीं प्राचीन मिथिला थी। Readmore>>

 
  
 
  

मैथिलसाम्प्रदायिकी विवस्वतषष्ठीकथा

मिथिलामे छठिपूजाक संस्कृतमे कथा वर्षकृत्य सभमे देल गेल अछि। आब संस्कृतक प्रचलन कम भए गेल तें लोक सभकें कथा सुनबाक लेल असुविधा होइत छनि। एतय ध्वन्यंकन सेहो भेटत।...........Read more>>

 
  
 
   
  
 
  

प्रकाशन

पुस्तक प्रकाशनमे लेखकक तकनीकी सहयोगक लेल प्रस्तुत।

 
  
 
  

मिथिलाक संस्कृति

पूब, पश्चिम आ दक्षिणमे महानदीसँ तथा उत्तरमे हिमालय पर्वतसँ घेराएल मिथिलामे संस्कृतिक प्रवाह अदौकालसँ स्वतन्त्र रहल। एतए अपन संस्कृतिक प्रति लोकक आस्था एकरा संरक्षित करबामे सहायक सिद्ध भेल। तें हमरालोकनि देखैत छी जे एतय संस्कृतिमे परिवर्तन कमसँ कम भेलैक। इतिहासक साक्ष्यसभ कहैए जे समस्त पूर्वोत्तर भारतमे एहिठामसँ संस्कृतिक प्रसार भेल। एतए सलहेस, लोरिक, दीनाभद्री, कोइलावीर आदिक गाथा सुरक्षित रहल तँ दोसर दिस शाक्त, शैव, बौद्ध, वैष्णव, गाणपत्य आ सौर सभ परन्पराक उपासना पद्धति एक दोसरासँ तालमेल बैसबैत प्रवाहित होइत रहल......Read more>>

 
  
 
  

मिथिलाक कर्मकाण्ड
मिथिला, बंगाल, आसाम उडीसा आ नेपाल ई समस्त पूर्वोत्तर प्रदेश कर्मकाण्डक परम्परामे लगभग एक समान रहल। एतय 7म शती धरि वैदिक परम्परा जीवित रहल मुदा एकर तुरते बाद बौद्ध महायान, शाक्त तन्त्र आ आगमक अन्य शाखाक बीच समन्वय स्थापित करैत एकटा धारा विकसित भेल। फलस्वरूप एतय पंचदेवोपासनाक प्रधानता रहल जकर मूल उद्देश्य सामाजिक समन्वय छल। एतय विशेषता ई रहलैक जे दुर्गोत्सव मे शाबरनृत्यक विधान धरि कएल गेल। तें मिथिलाक कर्मकाण्ड भारतक दोसर भागक कर्मकाण्डसँ पृथक् विशेषता रखने अछि......Read more>>

 
  
 
  

मिथिलाक इतिहास

मिथिलाक इतिहास पर एखनहुँ धरि बहुत रास साक्ष्य माँटिमे गडल अछि वा मन्दिर सभ पर लागल धूरासँ लेपल अछि। प्रसन्नताक विषय थीक जे वर्तमानमे संचार-तकनीकक माध्यमसँ ओ साक्ष्यसभ लोकक सोझाँ आबि रहल अछि। विशेष रूपसँ पुरातात्त्विक सामग्री जेना मूर्ति, देबाल आदि सेहो जे.सी.बी. मशीनसँ ठाम-ठाम खुदाई होएबाक कारणें देखार भए रहल अछि। शिलालेख सँभ सेहो सोझाँ आबि रहल अछि। एतय एहने किछु सामग्रीक संकलन कएल गेल अछि जाहिसँ मिथिलाक इतिहासक ठोस नवीन साक्ष्य संकलित भए सकए।....Read more>>

 
  
 
  

मिथिलाक्षर

मिथिलाक अपन लिपि थीक मिथिलाक्षर, जे 7म शतीमे सिद्धमातृका लिपिसँ निकलल आ अकर एखनि धरि प्राचीनतम उदाहरण 10 शतीक सहोदरा मंदिर अभिलेख, नरकटियागंजमे भेटल अछि। ओहि कालसँ 19म शतीक अंतधरि ई लिपि लगभग एके रूपमे सुरक्षित रहल। द आ भ अक्षरकें छोडि बाँकी सभटा एके रंगक अक्षर रहलैक। 20म शतीमे एकर अवनति आरम्भ भेल आ लगभग 1970क बाद एकर प्रयोग पूर्णतः विलुप्त भए गेल। आइ प्रसन्नताक विषय थीक जे एकरा फेरसँ प्रचलनमे अनबाक लेल प्रयत्न भए रहल अछि। एहि लिपिक मूल धारा कें सोझाँ अनबाक प्रयास एतए कएल गेल अछि।.......Read more>>