Brahmi Publication

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Worship of Twelve Adityas in each month

हेमाद्रि (१३वीं शती) ने अपने ग्रन्थ चतुर्वर्ग-चिन्तामणि में प्रत्येक मास की सप्तमी तिथि को भगवान् सूर्य की उपासना का वर्णन किया है तथा उनकी महिमा का वर्णन अलग अलग पुराणों के वचनों के द्वारा प्रतिपादित किया है। हेमाद्रि के अनुसार प्रत्येक मास में भगवान् सूर्य के 12 रूपों की पूजा की जाती है-

जैसे-

  • माघ में वरुण,
  • फाल्गुन में सूर्य,
  • चैत्र में अंशुमाली,
  • वैशाख में धाता,
  • ज्येष्ठ में इन्द्र,
  • आषाढ एवं श्रावण मास में रवि,
  • भाद्र में भग,
  • आश्विन में पर्जन्य,
  • कार्तिक में त्वष्टा,
  • अग्रहण में मित्र
  • पौष में विष्णु

इन रूपों में प्रत्येक मास भगवान् सूर्य की पूजा की जाती है। (हेमाद्रि, व्रतखण्ड, अध्याय ११)।

इसी तथ्य को साम्बपुराण (अध्याय 9) भी कहा गया है। किन्तु वहाँ नाम के क्रम में अन्तर है।

साम्ब-पुराणम्
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उत्तिष्ठन्ति सदा ह्येते मासैर्द्वादशभिः क्रमात्। 

विष्णुस्तपति चैत्रे तु वैशाखे चार्यमा तथा  ५

विवस्वान् ज्येष्ठमासे तु आषाढे चांशुमान् स्मृतः। 

पर्जन्यः श्रावणे मासि वरुणः प्रोष्ठसंज्ञके।।

इन्द्रो ऽश्वयुङ्मासे तु धाता तपति कार्तिके  ६

मार्गशीर्षे तथा मित्रः पूषा पौषे दिवाकरः। 

माधे भगस्तु विज्ञेयस्त्वष्टा तपति फाल्गुने  ७

एतैर्द्वादभिर्विष्णुरश्मिभिर्दीप्यते सदा।

 

 

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