ललित-विस्तरमे लिपिक सूची

ललितविस्तर बौद्ध महायान ग्रन्थ थिक जाहिमे बुद्धक जन्म आ हुनक लीलाक वर्णन कएल गेल अछि। एहिमे 27 अध्याय अछि आ प्रत्येक अध्यायक नाम परिवर्त थिक। एकर एकटा चीनी अनुवाद ईसाक 308 ई. में भेल अछि तें एकर रचना एहिसँ पूर्व मानल गेल अछि।
एकर 10म परिवर्तक नाम थिक- लिपिशालासंदर्शन परिवर्त। एहिमे कथा अछि जे बुद्ध जखनि बच्चा रहथि तँ पाटी (उरगसारचन्दनमयं लिपिफलकमादाय) लए अपन आचार्य विश्वामित्रक लग लिपि सिखबाक लेल गेलाह, मुदा ओ सामान्य छात्र नहिं रहथि। किछु सिखबासँ पहिनहिं ओएह आचार्यसँ पुछलथिन जे अहाँ हमरा कोन-कोन लिपि सिखाएब? [Lalitavistara>>]

ललितविस्तरक संगत पृष्ठ

एतहि 64 लिपिक सूची एहि प्रकारें अछि-

  1. ब्राह्मी 
  2. खरोष्टी
  3. पुष्करसारिं
  4. अङ्गलिपि
  5. वङ्गलिपि
  6. मगधलिपि
  7. मङ्गल्यलिपि
  8. अङ्गुलीयलिपि
  9. शकारिलिपि
  10. ब्रह्मवलिलिपि
  11. पारुष्यलिपि
  12. द्राविडलिपि
  13. किरातलिपि
  14. दाक्षिण्यलिपि
  15. उग्रलिपि
  16. संख्यालिपि
  17. अनुलोमलिपि
  18. अवमूर्धलिपि
  19. दरदलिपि
  20. खाष्यलिपि
  21. चीनलिपि
  22. लूनलिपि
  23. हूणलिपि
  24. मध्याक्षरविस्तरलिपि
  25. पुष्पलिपि
  26. देवलिपि
  27. नागलिपि
  28. यक्षलिपि
  29. गन्धर्वलिपि
  30. किन्नरलिपि
  31. महोरगलिपि
  32. असुरलिपि
  33. गरुडलिपि
  34. मृगचक्रलिपि
  35. वायसरुतलिपि
  36. भौमदेवलिपि
  37. अन्तरीक्षदेवलिपि
  38. उत्तरकुरुद्वीपलिपि
  39. अपरगोडानीलिपि
  40. पूर्वविदेहलिपि
  41. उत्क्षेपलिपि
  42. निक्षेपलिपि
  43. विक्षेपलिपि
  44. प्रक्षेपलिपि
  45. सागरलिपि
  46. वज्रलिपि
  47. लेखप्रतिलेखलिपि
  48. अनुद्रुतलिपि
  49. शास्त्रावर्तां
  50. गणनावर्तलिपि
  51. उत्क्षेपावर्तलिपि
  52. निक्षेपावर्तलिपि
  53. पादलिखितलिपि
  54. द्विरुत्तरपदसंधिलिपि
  55. यावद्दशोत्तरपदसंधिलिपि
  56. मध्याहारिणीलिपि
  57. सर्वरुतसंग्रहणीलिपि
  58. विद्यानुलोमाविमिश्रितलिपि
  59. ऋषितपस्तप्ता रोचमाना
  60. धरणीप्रेक्षिणीलिपि
  61. गगनप्रेक्षिणीलिपि
  62. सर्वौषधिनिष्यन्दा
  63. सर्वसारसंग्रहणी
  64. सर्वभूतरुतग्रहणी।
  1. एहि 64 लिपिक सूचीमे अङ्गलिपि, वङ्गलिपि, मगधलिपि आ पूर्वविदेहलिपि आदि स्थानक नामसँ अछि। एहिमे पूर्वविदेहलिपि मिथिलाक क्षेत्रक ओहि कालक लिपिक पृथक् शैलीक संकेत करैत अछि। यद्यपि ई सूची ऐतिहासिक दृष्टिसँ बहुत प्रामाणिक नहिं कहल जा सकैत अछि, किएक तँ एतए लिपिसभक निर्देश करब अभीष्ठ नै अपितु बुद्धक अलौकिक प्रतिभाक निर्देश अभीष्ट अछि। ग्रन्थकारक स्पष्ट उद्देश्य अछि जे बुद्ध सर्वज्ञ रहथि आ तें लिपि सिखबाक लेल गेलाह तँ अपन आचार्ये कें पढाबए लगलाह। एतय आचार्यक नामकरण सेहो विश्वामित्रक रूप में कएल गेल अछि। विश्वामित्र रामक पहिल गुरु रहथि। ललितविस्तर ग्रन्थ लिखबाक काल आदर्श आचार्यक रूपमे विश्वामित्रक प्रसिद्धि जनसामान्यमे छल होएत। ओहि कालमे रामकथाक बेसी प्रसिद्धिक कारणें विश्वामित्र एतए गुरु बनाओल गेल छथि।

तथापि एतबा तँ अवश्य मानल जा सकैत अछि जे ई लेखनक क्षेत्रगत भिन्नताक संकेत अछि। तें विद्वान् लोकनि आधुनिक मिथिलाक्षरक पूर्व संकेत विदेह लिपि मे मानैत छथि।

“A Survey of Maithili Literature
By Radhakrishna Choudhary, p.21- The Maithili script, Mithilakshara or Tirhuta as it is popularly known, is of a great antiquity. The Lalitavistara mentions the Vaidehi script. Brahmi is considered to be the mother of all Indian scripts. The Maithili script is derived from an eastern alphabet of a variety of the Gupta script.”

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