पिछले दो पृष्ठों से हम संस्कृत भाषा सीखने के लिए पाठमाला दे रहे हैं। इसके अन्तर्गत सबसे पहले शब्दरूपों को कंठस्थ करने का पाठ आरम्भ किया है।

पिछले पोस्ट पर पाठ- 2. में 10 स्त्रीलिंग शब्दों के रूप दिये गये हैं।

इससे भी पहले पाठ-1. में 10 पुल्लिंग शब्दों के रूप दिये गये हैं।

हमें आशा है कि हमारे नियमित पाठक शब्दों का रूप कण्ठस्थ कर चुके होंगे। इस पृष्ठ पर 10 नपुंसक लिंग शब्दों के रूप दिये जा रहे हैं।

विभक्ति एवं वचन का विचार किये बिना सीधे इन शब्दों का रूप कण्ठस्थ कर लेना सबसे उपयुक्त है। ध्यातव्य है कि प्रारम्भिक पाठों में याद करने से पूर्व अन्य किसी भी बात पर ध्यान देने से बाधा उत्पन्न होती है।

ये दश नपुंसक शब्द परम्परा से नायक माने गये हैं। संस्कृत शिक्षण-पद्धति में प्राचीन काल से यह श्लोक प्रचलित है:

ज्ञानं दधिः पयो वर्म धनुर्वारि जगत्तथा।

मधु नाम मनोहारि दशैतानि नपुंसके।

ज्ञानम् (ज्ञान)-

ज्ञानं ज्ञाने ज्ञानानि। ज्ञानं ज्ञाने ज्ञानानि। (शेष रूप अकारान्त पुल्लिंग के समान होंगे।)

दधि (दही)-

दधि दधिनी दधीनि। दधि दधिनी दधीनि। दना दधिभ्याम् दधिभिः। दध्ने दधिभ्याम् दधिभ्यः। दध्नः दधिभ्याम् दधिभ्यः। दध्नः दध्नोः दध्नाम्। दध्नि, (दधनि) दध्नोः दधिषु। दधे (दधि) दधिनी दधीनि।।

पयस् (पानी या दूध)-

पयः पयसी पयांसि। पयः पयसी पयांसि। पयसा पयोभ्याम् पयोभिः। पयसे पयोभ्याम् पयोभ्यः। पयसः पयोभ्याम् पयोभ्यः। पयसः पयसोः पयसाम्। पयसि पयसोः पयःसु। हे पयः हे पयसी हे पयांसि।

वारि (पानी)-

वारि वारिणी वारीणि। वारि वारिणी वारीणि। वारिणा वारिभ्याम् वारिभिः। वारिणे वारिभ्याम् वारिभ्यः। वारिण: वारिभ्याम् वारिभ्यः। वारिणः वारिणोः वारीणाम्। वारिणि वारिणो: वारिषु।

धनुष् (धनुष)-

धनुः धनुषी धनूंषि। धनुः धनुषी धनूंषि। धनुषा धनुर्भ्यां धनुर्भिः। धनुषे धनुर्भ्यां धनुर्भ्यः। धनुष: धनुर्भ्यां धनुर्भ्यः। धनुषः धनुषोः धनुषाम्। धनुषि धनुषोः धनुःषु। हे धनुः हे धनुषी हे धनूंषि।।

जगत् (संसार)-

जगत् जगती जगन्ति। जगत् जगती जगन्ति। जगता जगद्भ्यां जगद्भिः।  जगते जगद्भ्यां जगद्भ्यः। जगतः जगद्भ्याम् जगद्भ्यः। जगतः जगतोः जगताम्। जगति जगतो: जगत्सु। हे जगत् हे जगती हे जगन्ति।

मधु (शहद)-

मधु मधुनी मधूनि। मधु मधुनी मधूनि। मधुना मधुभ्याम् मधुभिः। मधुने मधुभ्याम् मधुभ्यः। मधुनः मधुभ्याम् मधुभ्यः। मधुनः मधुनोः मधूनाम्। मधुनि मधुनोः मधुषु। हे मधु हे मधुनी हे मधूनि।।

वर्म (कवच)-

वर्म वर्मणी वर्माणि। वर्म वर्मणी वर्माणि। वर्मणा वर्मभ्याम् वर्मभिः। वर्मणे वर्मभ्याम् वर्मभ्यः। वर्मण: वर्मभ्याम् वर्मभ्यः। वर्मणः वर्मणोः वर्मणाम्। वर्मणि वर्मणोः वर्मसु। हे वर्मन् हे वर्मणी हे वर्माणि।।

नाम (नाम)-

नाम नामनी नामानि। नाम नामनी नामानि। नाम्ना नामभ्याम् नामभिः। नाम्ने नामभ्याम् नामभ्यः। नाम्नः नामभ्याम् नामभ्यः। नाम्नः नाम्नोः नाम्नाम्। नाम्नि (नामनि) नाम्नोः नामसु। हे नाम हे नामनी हे नामानि।

मनोहारि (मन को लुभानेवाला)-

मनोहारि मनोहारिणी मनोहारीणि। मनोहारि मनोहारिणी मनोहारीणि। मनोहारिणा मनोहारिभ्याम् मनोहारिभिः। मनोहारिणे मनोहारिभ्याम्, मनोहारिभ्यः। मनोहारिणः मनोहारिभ्यां मनोहारिभ्यः। मनोहारिणः मनोहारिणोः मनोहारिणाम्। मनोहारिणि मनोहारिणोः मनोहारिषु। हे मनोहारि मनोहारिणी हे मनोहारीणि।

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