First Indian Lady teacher

एक महिला ने काशी में जाकर 18वीं शती में स्कूल खोलकर महिलाओं और खासकर विधवाओं को पढ़ाने-लिखाने का कार्य आरम्भ किया। पर, इतिहास से उसका नाम मिटा दिया गया।Continue Reading

टुकड़े-टुकडे गैंग

मैथिलीक जाहि स्वरूपक ओ विरोध करैत छथि ओही स्वरूपक व्यवहार जखनि सम्पादक स्वयं करैत छथि तखनि ऊपरमे लिखल सभटा बात केवल आगि लगएबाक साधन थीक आ एकरे कहैत छै- अगिलेसुआक कथा।Continue Reading

कुलधर्म

हम इतिहास को उलट कर देखें तो पता चलेगा कि यूरोपीयन प्रभाव के कारण सबसे पहले तथा सबसे अधिक प्रभावित हमारे पारम्परिक उत्पादक वर्ग हुए,Continue Reading

Dalita Priest

हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि भारत की परम्परा में मन्दिरों में पूजा करने के विशेष नियम हैं, विशेष मन्त्र हैं। मन्त्रों की अपनी-अपनी अलग-अलग परम्परा है। दक्षिण भारत के वैष्णव मन्दिरों में वैखानस आगम से पूजा होती है। Continue Reading

गोनू झा

इतिहासकारों का मानना है कि वे कर्महे मूल के बीजी पुरुष वंशधर के तीन पुत्रों में एक थे। पंजी में उनके नाम के साथ धूर्तराज शब्द लगा हुआ है- करमहे सोनकरियाम मूल मे बीजी मम बंशधर, ऐजन सुतो मम हरिब्रह्म, म.म. हरिकेश, म.म. धूर्तराज गोनू। Continue Reading

Book cover nyayapalika-dasha-evam-disha

प्रस्तुत संग्रह में कुल मिलाकर 43 आलेख हैं। ये आलेख भिन्न भिन्न पत्रिकाओं में, समाचार पत्रें में प्रकाशित हो चुके हैं, या किसी न किसी सेमिनार में पढे गये हैं। इन प्रत्येक आलेखों में समस्याएँ उठायी गयीं हैं तथा उनके समाधान के लिए चिन्तन प्रस्तुत किया गया है।Continue Reading

सिंगरहारक फूल, शेफालिका

आप कल्पना कीजिए कि एक दूसरे की विपरीत दिशा में आपके आगे से तथा पीछे से दो बल लगे हुए हैं। पाप पीछे की ओर से खींच रहा है और धर्म आगे की ओर बढ़ा रहा है। पाप को निर्बल करना है और धर्म को सबल करना है। यहीं पर इष्टापूर्त की व्याख्या की गयी है, जिसमें दो शब्द हैं- इष्ट एवं पूर्त। इष्ट का अर्थ है- अग्निहोत्र, तप, सत्य, वेदों का पालन, अतिथि-सत्कार और वैश्वदेव। पूर्त का अर्थ है- परोपकार के लिए कुआँ, तालाब, मन्दिर, अन्नक्षेत्र (सदावर्त) आदि का निर्माण करना तथा उसे चलाना।Continue Reading

ड्यौढीक दृश्य

दरभंगा राज आ ओकर मधुबनी शाखाक द्वारा उत्सव सेहो तखनहिं मानल जाइत छल जखनि कि कोनो जनहित कार्य कएल जाए। यूरोपक रानीक जुबली मनाओल गेल तँ 14,000 रुपयाक चन्दा देनिहार राज परिवारक सदस्य सभ रहथि आ ओहिसँ कम्बल, अन्न आ खपड़ा बाँटल गेलैक। पोखरि खुनाओल गेल।Continue Reading

पारदर्शिता के नाम पर जब मीडिया अपराध समाचार को प्रमुखता देने लगी है, तो चिन्ता तो अवश्य होती है कि भला सकारात्मक समाचार के लिए कैसा स्थान हम भविष्य में दे पायेंगे!Continue Reading

Rama Janma Bhumi in 1902

विक्रमादित्यक बनाओल मन्दिर जखनि ध्वस्त भए गेल तखनि 12म शतीमे गहड़वालक राजा गोविन्दचन्द्रक सामन्त अनयचन्द्र जन्मस्थान पर विशाल मन्दिर बनओलनि जेकर शिलालेख विवादित ढाँचा खसएबाक क्रम मे 6 दिसम्बर, 1992 कें भेटल छल।Continue Reading