म.म. परमेश्वर झा हिनक काल देवसिंहक समयमे मानैत छथि। मिथिलातत्त्वविमर्शमे ओ लिखैत छथि जे महाराज भवसिंह जखनि छत्तीस वर्ष राज्य कए वाग्वतीक कातमे अपन शरीर त्याग कएल ओही आसन्नकालमे धूर्त गोनू रहथि। (पृ. पूर्वार्द्ध 150-51, प्रथम संस्करण, दरभंगा, 1949ई.) म.म. परमेश्वर झाक अनुसार गोनूझाक काल 14म शतीक मध्यकाल मानल जएबाकContinue Reading

manuscript from Mithila

आज हम छपी हुई किताबें खरीदते हैं और पढ़कर अनेक तरह की जानकारी पाते हैं। आधुनिक काल में पुस्तकों का प्रकाशन डिजिटल प्रिंटिंग, ऑफसेट प्रिंटिंग आदि के द्वारा होता है लेकिन कम्प्यूटर के आने से पहले सभी अक्षर लोहे से बनते थे, जिन्हें एक दूसरे से जोड़कर एक-एक पृष्ठ काContinue Reading

भवनाथ झा इतिहास का अध्ययन करते समय अक्सर हम केन्द्रीय सत्ता में बैठे साम्राज्य का अध्ययन कर सम्पूर्ण क्षेत्र की सामाजिक तथा धार्मिक स्थिति का आकलन कर बैठते हैं जिसके कारण बहुत कुछ अन्धकार में रह जाता है। खासकर मुगल काल के इतिहास में यह स्थिति देखने को मिलती है।Continue Reading

मिथिला की उपासना-पद्धति में खासियत क्या है? इस प्रश्न पर हम विचार करते हैं तो पता चलता है कि मिथिला में पूजा-पाठ की परम्परा मध्यकाल के परिवर्तनों से प्रभावित नहीं हुआ है। यहाँ आज भी जो पूजा-विधि है वह आदिकाल की है। आपने देखा होगा कि मिथिला में सत्यनारायण कीContinue Reading

यह आलेख अहल्या-स्थान मन्दिर, अहियारी, दरभंगा से प्रकाशित अहल्या-संदेश (स्मारिका) में 2023ई. में प्रकाशित है। महाकवि विद्यापति ने भी ‘भूपरिक्रमणम्’ नामक ग्रन्थ में जनक के देश का विवरण दिया है इसके अनुसार बलराम नरहरि नामक देश को छोड़कर पाटलि नामक देश पहुँचे जहाँ उन्होंने देवी की पूजा कर नगर कीContinue Reading

एक बेर गोनू झा भोज करबाक घोषणा कएलनि- ‘हम परसू भरि गामक लोककेँ अगबे मधुरक भोज खुआएब।’ गामक लोक जमानि फाँकब शुरू कए देलनि- “गोनू झा अगबे मधुरक भोज करताह तँ खूब खाएब।” किछु गोटे प्रस्ताव देलनि जे मधुरक संग कनेक चूड़ा सेहो भए जाए तँ कोन हर्ज? आ दहीContinue Reading

सनातन धर्म में परिवर्तन की दिशा

सनातन धर्म में भी हर शताब्दी में समाज की आवश्यकता को देखते हुए हमारे सन्तों-महात्माओं ने परिवर्तन किया है। यहाँ उपासना-पद्धिते में आये परिवर्तन को रेखांकित किया गया है।Continue Reading

manuscript from Mithila

गोनू झाक व्यक्तित्व आ ओकर स्रोत मिथिलामे पंजी अछि। एहि पंजीमे 1. अपन नाम, 2. पिताक नाम 3. मूल गामक नाम, 4. प्रव्रजित गामक नाम, 5. मातामहक नाम, 6. मातामहक मूल गाम आ 7. प्रव्रजित गामक नाम, 8. मायक मातामहक नाम, 9. हुनक मूल गाम आ 10. प्रव्रजित गामक नामContinue Reading

bipra-dhenu--

लाला बैजनाथ ने Modern Hindu Religion And Philosophy यानी आधुनिक भारतीय धर्म एवं दर्शन पर व्याख्यान दिया था। इस व्याख्यान के अंतर्गत उन्होंने तुलसीदास के रामचरितमानस के विषय में जो कुछ लिखा है, वह इस विषय में कहा गया सबसे महत्त्वपूर्ण व्याख्यान प्रतीत होता है। वे लिखते हैं- ‘आधुनिक राम वाल्मीकि के राम नहीं है, जो कि उनके समकालीन थे, वे आज तुलसीदास के राम हैं, जो 1600ई. के आसपास हुए थे औऱ उनका प्रभाव उनके जीवनकाल से अधिक आज के समाज पर है।”Continue Reading

बिप्र धेनु सुर संत हित लीन मनुज अवतार भगवान् श्रीराम के अवतार लेने के बारे में गोस्वामीजी कहते हैं कि वे ब्राह्मण, गाय, देवता तथा संत की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। स्पष्ट है कि जो लोग इस पृथ्वी पर कष्ट पाते हैं और कष्ट का अंत करने केContinue Reading