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मकर संक्रान्ति, 2022

लेकिन अनेक आचार्यों का मत है कि यदि सूर्यास्त हो जाने के बाद संक्रमण हो तो अगले दिन पुण्यकाल माना जाना चाहिए। गणितीय स्थिति जो कुछ भी हो, हमें उन पूर्वाचार्यों के मत को सम्मान देना चाहिए। इस मत से 15 जनवरी को पुण्यकाल मध्याह्न से पूर्व रहेगा। जो जिस क्षेत्र के हैं, उन्हें अपनी परम्परा का पालन करना चाहिए।Continue Reading

Kumbhakarna sleeping

ब्रह्माजी ने कहा- हे वाणी सरस्वती, जैसा देवतालोग चाहते हैं, इस राक्षस की वैसी ही वाणी तुम बन जाओ।
सरस्वती ने यही काम किया। एक दिन सोना और छह महीना खाना खाने के बदले कुम्भकर्ण उलटा बोल गया- एक दिन खाना और छह महीना सोना।Continue Reading

samvedana

डा० सिन्हा चोट्टे घूरि घर गेलाह। लैपटॉप खोललनि आ अपन सहयोगी सभके ई-मेल कएल- “हमर शोध लेल वरदक स्पेसीज उपयोगी नै होएत। अहाँ सभ दोसर कोनो जानवरक खोज करू जकरामे भावना नै रहए। Continue Reading

घुरि आउ कमला आवरण

परेत फेर कहए लागल- “गाममे फुलिया आ हमर बात सभ केओ बूझि गेल रहए। ओकर बहिन सेहो सुनलक। गप्प चललै। फुलिया सँ हमर बियाह भए गेल। ओही साल कमला माइ सेहो किरपा कएलखिन। एही गाम देने बहए लगलीह। खूब धानो उपजै। माछ मखान भेट, सिंघार, करहर, सारूख ई सभ तँ अलेल रहै।…Continue Reading

mandan-bharati

-“तँ की महाराजसँ कहि भकसी झोंकबाक मरबा देब आ कि हमर गुरुए जकाँ पहाड़परसँ धकेलि देब।” मण्डन मिश्र बजलाह।
-“अहाँ अइयो वैदिक धर्मक पताका कन्हेठने संघारामक साधनाक विरोध कए रहल छी। हमरा अहाँक सभटा क्रिया-कलापक सूचना अछि। अहाँ सनक विद्वानकेँ एतेक छोट दण्ड नै भेटबाक चाही वैदिकप्रवर!’ श्रमण महाराजहि जकाँ आदेश-स्वरमे बजलाह। लंकामे जे सबसँ छोट सेहो उनचास हाथ!Continue Reading

dhani kalhi jebai panjab

रूपनक मोन छौ-पाँच करए लगलनि। नाँओ खूजि जेतै त गाममे उकबा ऊठि जेते। आ तैमे मारल जेतै बेचारा बहुरी झा। तेहन लोकक बेटी पुतोहु उखाड़ने रहनि जे ओकरा पर कैफा करथिन त उनटले डेंगा देतनि। ओकरा कोन! नढड़ा हेलल अछि। सभ चिन्है छै ओकरा दरोगासँ एम० पी० धरि। भोटक दिन ओहिना थोड़बे धड़फड़न देने रहै-ए बूथ पर। ते नाँओ कहै सँ नीक जे बेचारा अनभुआरेमे दैवेक डाङ बूझि कʼ छातीमे मुक्का मारि लेथु। ते रूपन बुझियो कʼ झूठ बाजि गेला जे हम नै चिनहलिए। जावत लग जाइ तावत ओ निपत्ता भʼ गेल।Continue Reading

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हम भारत माता की संतान हैं। हम सिन्धु नदी के किनारे से चलकर पूरे भारत में फैले हुए हैं, तो हम सिन्धु से फैले सिन्दु हैं, हिन्दु हैं। हमारे हिन्दुत्व की व्याख्या हमारी ही धरती और पानी से हो सकती है। आरम्भ से लेकर आजतक हमें एक-दूसरे से जोड़कर रखने के लिए हमारे पूर्वजों ने बहुत प्रयास किया है। जबतक हम उन सभी प्रयासों को एक जगह तलहत्थी पर रखे आँवले की तरह नहीं देख पायेंगे हम हिन्दुत्व को पहचानने में भयंकर भूलकर बैंठेंगे।Continue Reading

article by Radha kishore Jha

वेद या वेदान्त प्रतिपाद्य धर्म क्या है? तैत्तिरीय श्रुति हमें आदेश एवं उपदेश देती है कि धर्म पथ पर चलो- धर्मं चर। वसिष्ठ धर्मसूत्र भी कहता है कि धर्मं चर माधर्मम्। धर्म पथ पर चल, अधर्म पर नहीं। अतः हमें जानना चाहिए कि वेद या वेदान्त प्रतिपाद्य धर्म क्या है?Continue Reading

मैथिली भाषा

एखनि हम मैथिलीक विभिन्न विद्वान् आ सामान्य जन दुहूक लिखल लगभग 40 टा आलेख कें एक पुस्तक में संकलित कए ओकर सम्पादन कए रहल छी। एहि क्रममे हमरा परसर्गक रूपमे ‘के’ एवं ‘से’क प्रयोग मे एतेक विविधता आ भ्रान्ति भेटल जे ओहि पर लिखब आवश्यक बुझाइत अछि। ई दुहू हिन्दीकContinue Reading