बहुतो गोटे कें ई भ्रम छनि जे जनकपुर पर राज दरभंगाक अधिकार कोना होएत। ओ तँ मकबानी राजाक अधीन छल। वास्तविकता ई अछि जे स्वयं मकबानी शासक राज दरभंगाक अधीन एकटा सामन्त छलाह। ओ प्रति वर्ष मालगुजारीक भुगतान करैत रहथि। एहि प्रकारें मकबानी शासक दरभंगाक अधीनस्थ छलाह।

जखनि नेपालक राजा पृथ्वी नारायण शाह मकबानपुर पर अधिकार कए लेलनि तखनि ओहो दरभंगामे कर जमा करैत रहलाह।

दस्तावेजक स्वरूप

भारतमे जखनि इस्ट इंडिया कम्पनी अपन पयर पसारए लागल। तखनि एहि ठाम संसाधन जुटएबाक लेल विभिन्न प्रकारक योजना बनाओल गेल रहए। एहि योजना सभमे एकटा छल- मिस्टर थॉमस लॉ के द्वारा प्रस्तुत एकटा मुकर्ररी व्यवस्था। एकर विस्तृत विवेचन RISING RESOURCES नामक पम्फलेट मे भेल छल। एही योजनाकें लॉर्ड कार्नवालिसक द्वारा अपनाओल गेल छल।

मुदा एहि व्यवस्थाक प्रतिवाद करैत एकटा अज्ञातनामा बृटिश अधिकारी द्वारा Summary Remarks on The Resources Of The East Indies नामक पुस्तक लिखल गेल। एकर लेखक अपन परिचय दैत एतबै कहैत अछि जे ओ राजस्व आ विधि विभाग में बहुत दिन धरि काज कएने छथि।

मि. लॉ अपन योजनाक विरोध होइत देखि एहि अधिकारी कें प्रकाशित पुस्तकक संग सोझां-सोझीं बहस करबाक लेल बजओलनि।

20 मई, 1787ई.क पत्र

एही बहस करबाक लेल एहि दस्तावेजक संकलन आ मुद्रण लंदनमे कएल गेल छल। एहि प्रकारें ई पुस्तक ठोस दस्तावेजक संकलन थीक। एहि पुस्तकमे पृ.स. 127-128 पर तिरहुतक जिलाधिकारीक पत्र सभक संकलन कएल गेल अछि।

एहि सभमे एकटा पत्र अछि जे 20 मई 1787ई.कें तिरहुतक जिलाधिकारी जी.डी. ग्रैंडक द्वारा लिखल गेल अछि। एहि विस्तृत पत्रमे तिरहुतक राजाक संग नेपालक मकबानी शासकक संबन्ध पर प्रकाश देल गेल अछि। एहिमे कहल गेल अछि जे नेपालक मकबानी राजा दरभंगाक राजा कें कर दैत छलाह। जखनि नेपालक पृथ्वी नारायण शाह मकबानपुर पर कब्जा कए लेलनि तखनहु ओ राज दरभंगाकें साढ़े बारह ठामें कर दैत रहलाह। 1181 साल अर्थात् 1773ई. मे जखनि मिस्टर कीलाई राजा तिरहुतक कलक्टर रहथि तखनहुँ धरि ओ भुगतान होइत रहल अछि।

एही पत्रमे आगाँ कहल गेल अछि जे तहटर जिला (वर्तमान तेह्रथुम जिल्ला) जे कि मकबानीपुर राजाक अधिकारमे छल ताहि पर राज दरभंगाक अधिकार होएबाक चाही।

मुदा फसली 1182 अर्थात् 1774ई. मे पटनाक कौंलिसक एक सज्जन ओकरा अलग जमींदारी कए देलनि। तहियासँ ओकर मालगुजारीक वसूली पटनासँ होमए लागल अछि। तकर फल ई भेल अछि जे एकटा हाथी प्रति वर्ष जे नजराना भेटैत छल, सेहो बंद भए गेल।

ई राज दरभंगाक द्वारा न्यायालयमे देल गेल एकटा प्रतिवाद पत्र थीक, जकरा तिरहुतक जिलाधिकारी अपन पत्रमे उद्धृत कए राज दरभंगाक स्थिति स्पष्ट कएने छथि।

एही पुस्तक मे एकटा सारिणी देल गेल अछि। एहिमे सन् 1779सँ 1787 धरिक राज दरभंगाक आमदनीक विवरण अछि। एहिमे जे मौजा सभ अछि से एकर व्यापक क्षेत्र स्पष्ट करैत अछि।

table of the income of Raj Darbhanga

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