jiutiya vrat 2022

इस प्रकार, यह सिद्ध है कि जीवित्पुत्रिका व्रत की मूल परम्परा मैथिलों की है। मैथिलेतर यदि इस व्रत को करते हैं तो उन्हें मिथिला की परम्परा माननी चाहिए। लेकिन केवल भिन्नता दिखाने के लिए इस प्रकार की अव्यवस्था फैलने से हमारे व्रतों-पर्वों की परम्परा की हानि होगी, यह बात हम सबको समझनी चाहिए। सिद्धान्त रूप में हमें चाहिए कि जहाँ का व्रत हम करते हैं वहाँ की जो अपनी मूल परम्परा है, उसका अनुसरण करें। अतः सभी श्रद्धालुओं को दिनांक 17 को जीमूतवाहन व्रत करना चाहिए।Continue Reading