संस्कृत पाठमाला 7 – कारक, सामान्य परिचय
विभक्तियाँ तो सात हैं किन्तु कारक छह ही हैं। षष्ठी विभक्ति अतिरिक्त है। चूँकि सम्बन्ध में शब्दों का क्रिया के साथ सम्बन्ध नहीं रहता है, इसलिए सम्बन्ध को कारक नहीं माना गया है।Continue Reading
विभक्तियाँ तो सात हैं किन्तु कारक छह ही हैं। षष्ठी विभक्ति अतिरिक्त है। चूँकि सम्बन्ध में शब्दों का क्रिया के साथ सम्बन्ध नहीं रहता है, इसलिए सम्बन्ध को कारक नहीं माना गया है।Continue Reading
संस्कृत में सर्वनाम संज्ञा है। इसकी सूची पाणिनि ने इस प्रकार दी है-
सर्व । विश्व । उभ । उभय। डतर । डतम । अन्य । अन्यतर। इतर। त्वत्। त्व। नेम। सम। सिम । तद् । यद् । एतद् । इदम्। अदस्। एका। Continue Reading
अनेक पाठकों के अनुरोध पर मैंने ‘धर्मायण’ के स्थायी-स्तम्भ के अन्तर्गत संस्कृत भाषा सीखने के लिए कुछ पाठों का क्रमशः प्रकाशन अंक संख्या 86 से किया था। उद्देश्य यह था कि ऐसे व्यक्ति जो हिन्दी, अंग्रेजी आदि भाषाओं के अच्छे जानकार हैं, संस्कृत सीखने की अभिरुचि रखते हैं, जिससे वे पुराणों तथा अन्य संस्कृत-ग्रन्थों की भाषा को समझ सके, विना अनुवाद के भी मूल पढ़कर उनका अर्थ लगा सकें।Continue Reading