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कुतुप आ रोहिण कोन समय थीक?

श्राद्ध आ एकोद्दिष्टक विषयमे कुतुप कालक विचार होइत अछि। एकोद्दिष्ट आदि पितृकर्म कोन तिथिक कोन दिन होएत आ कखनि आरम्भ करबाक चाही तकर विचार करबामे कुतुप आ रोहिण नामक दू मुहूर्तक विचार कएल जाइत अछि, जकर गणना करबाक विधि एतए देल जा रहल अछि।
सूर्योदयसँ सूर्यास्त धरिक समय कें 15 भागमे बाँटि देलासँ एक मुहूर्तक मान निकलैत अछि। सामान्यतः 48 मिनटक एक मुहूर्त होइत अछि, मुदा दिनमान छोट-पैघ भेलासँ हो कम-बेसी होइत अछि।
तें कुतुप कालक सूक्ष्म गणनाक लेल सूर्यास्तक समयकें दूना कए ली आ ओकरा 15सँ भाग दी। भागफलक रूपमे जतेक मिनट आओत से एक मुहूर्तक मान भेल। आब सूर्योदयक समयसँ जोडैत जाइ तँ पहिलसँ लए 15म मुहूर्त धरि निकलि जाएत।
एहिमे आठम मुहूर्त कुतुप कहबैत अछि।
एतए ध्यान देबाक थीक जे दिनमान कतबो छोट अथवा पैघ हो दिनक आधा पर 12 बजैत अछि। एहि प्रकारें आठम मुहूर्तक ठीक बीचमे 12 बाजि जाएत। तें विना कोनो गणनाक कहि सकैत छी जे 12 बजे सँ 24 मिनट पूर्व सँ 24 मिनट बाद धरि कुतुप वेला भेल।
एही कुतुप वेलामे एकोद्दिष्ट आरम्भ करबाक विधान कएल गेल अछि। मत्स्यपुराणक वचन पर्वनिर्णयमे पितृकर्मकनिर्णय (पृ. सं. 369) आलेखमे उद्धृत करैत कहल गेल अछि-
अह्नोः मुहूर्ता विख्याता दश पञ्च च सर्वदा।
तत्राष्टो मुहूर्तो यः स कालः कुतुपः स्मृतः।।
अष्टमे भास्करो यस्मान्मन्दीभवति सर्वदा।
तस्माददन्तफलदस्तत्रारम्भो विशिष्यते।।
ऊर्ध्वं मुहूर्तात् कुतुपाद् यन्मुहूर्तचतुष्टयम्।
मुहूर्तपञ्चकं ह्येतत् स्वधाभवनमिष्यते।।
एहि प्रकारें कुतुप कालमे आरम्भ कए अग्रिम चारि मुहूर्त पार्वण, एकोद्दिष्ट आदिक लेल मुख्य काल थीक।
मुदा एतए ध्यान रखबाक चाही जे रोहिण नामक जे नवम मुहूर्त होइत अछि, जे लगभग 12:24 बजेसँ 1:12 बजे धरि होएत, ओकर बाद एकोद्दिष्ट, पार्वण आदि आरम्भ नै करी।
अर्थात् 11:36 बजेसँ 1:12 बजे धरि जे कुतुप आ रोहिण नामक दू मुहूर्त अछि से एकोद्दिष्ट आदि आरम्भ करबाक उचित समय थीक।
आरभ्य कुतुपे श्राद्धं रोहिणं न तु लंघयेत्।
एतय इहो स्पष्ट कए दी जे एहि अवधिमे जाहि दिन जे तिथि रहत, ओहि दिन ओही तिथिक एकोद्दिष्ट होएत। पंचांगमे, कोन तिथि कखनि धरि रहैत अछि, से देल रहैत छैक। ओकरा देखि स्वयं गणना करी।

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