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अंगिकाक लेल लड़ाइ कम दिनसँ नै लड़ल जा रहल अछि। 1977ई. में सेहो सदन मे ई प्रश्न उठाओल गेल छल जे भागलपुर आकाशवाणी मे अंगिकाकें ओ स्थान किएक नै भेटि रहल अछि जे स्थान मैथिली कें दरभंगा में भेटल अछि।

प्रश्नकर्ता रहथि मुंगेर जिलाक डा. रामजी सिंह। हुनक प्रश्न छल-

डा० रामजी सिंह : क्या सूचना और प्रसारण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि:

(क) भागलपुर आकाशवाणी केन्द्र के प्रसारणों में अंगिका भाषा को उसी प्रकार स्थान न देने के क्या कारण हैं जिस प्रकार दरभंगा आकाशवाणी केन्द्र में मैथिली को प्राप्त है, जबकि भागलपुर क्षेत्र की भाषा अंगिका है :

(ख) विभिन्न भाषाओं के सम्पूर्ण प्रसारण में प्रत्येक भाषा को कितना रुपया दिया जाता है; और

(ग) दरभंगा केन्द्र की अपेक्षा भागलपुर केन्द्र को कम समय दिए जाने के क्या कारण हैं जबकि दरभंगा केन्द्र बाद में खुला था?

एकर लिखित उत्तर दिनांक 3 अगस्त 1977 ई.मे लालकृष्ण आडवानीक द्वारा देल गेल छल-

Written Answers * AUGUST 3

सूचना और प्रसारण मंत्री (श्री लाल कृष्ण आडवानी) :

(क) भागलपुर केन्द्र में 10 किलोवाट का मीडियम वेव ट्रांसमीटर है। इसके सेवा क्षेत्र के अन्तर्गत बिहार के 5 जिले अर्थात् भागलपुर, मधीर, पूर्णिया, सहरसा और संताल परगणा आते हैं, जिनकी जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या 1,54,62,751 है। अंगिका छोटी वाली है और यह केवल 4,23,502 लोगों द्वारा बोली जाती है, जो भागलपुर केन्द्र के सेवा क्षेत्र की कुल जनसंख्या का लगभग 2.7 प्रतिशत है। दरभंगा रेडियो स्टेशन के सेवा क्षेत्र में जो क्षेत्र पाता है, उसमें मैथिली एक प्रमुख भाषा है जो 61,21,000 लोगों द्वारा बोली जाती है। मैथिली में विकसित साहित्य है और यह साहित्य अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त है । यह बिहार के कुछ विश्वविद्यालयों में भी पढाई भी जाती है। अतः भागलपुर रेडियो स्टेशन पर अंगिका को वही स्थान देने का प्रश्न ही नहीं उठता जो दरभंगा रेडियो स्टेशन पर मैथिली को दिया जाता है।

(ख) सूचना आकाशवाणी, भागलपुर से एकत्रित की जा रही है और इसको सदन की मेज पर रख दिया जाएगा।

(ग) भागलपुर से प्रेषण की अवधि दरभंगा से प्रेषण की अवधि से 40 मिनट से 1 घंटा 35 मिनट तक कम है । यह इसलिए है क्योंकि भागलपुर केवल महायक केन्द्र ही है, जबकि दरभंगा आकाशवाणी का एक पूर्णरूपेण केन्द्र है।

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