चिकना गामक इतिहास-लेखन
आलोच्य पुस्तक दू भागमे अछि। पहिल भागमे लेखक अपन वंशावली, पारिवारिक सम्बन्ध लिखलाक उपरान्त चिकना गामक इतिहास आ वर्तमान स्थितिक विवरण देने छथि।Continue Reading
मिथिला आ मैथिलीक लेल सतत प्रयासरत
आलोच्य पुस्तक दू भागमे अछि। पहिल भागमे लेखक अपन वंशावली, पारिवारिक सम्बन्ध लिखलाक उपरान्त चिकना गामक इतिहास आ वर्तमान स्थितिक विवरण देने छथि।Continue Reading
एहिमे दरभंगाक महाराज लक्ष्मीश्वर सिंहक द्वारा जनहितमे कएल गेल काजक उल्लेख भेल अछि। संगहि कहल गेल अछि जे दरभंगाक महाराजा बड़ नीक अंगरेजी बाजि लैत छथि आ अपन जनताक सुख सुविधाक ध्यान रखैत छथि।Continue Reading
विश्वकर्मा पूजा 17 सितम्बर को ही क्यों मनाया जाता है? हमारे सभी पर्व-त्योहार भारतीय पंचांगों के अनुसार मनाया जाता है, किन्तु विश्वकर्मा पूजा हम अंगरेजी कैलेंडर के अनुसार क्यों मनाते हैं ?Continue Reading
हमरालोकनि सभ केओ जनैत छी जे कोनो पूजामे मुख्य देवताक आवाहन एसकर नै होइत छनि। हुनक आवाहन अङ्ग देवता, अस्त्र-शस्त्र, वाहन एवं परिवारक संग होइत अछि।Continue Reading
बहुत कम पाठकों को यह विदित है कि गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस के प्रथम सम्पादक, हिन्दी के आदि गद्यकार, पं. सदल मिश्र थे। उनके द्वारा सम्पादित यह ग्रन्थ कलकत्ता से 1810 ई. में प्रकाशित हुआ था।Continue Reading
शूद्र और उग्र से भी शुल्क लेना धर्म-सम्मत है।’ सर्वदा शूद्रत उग्रतो वाचार्यार्थस्याहरणं धार्म्यमित्येके। (1 । 2 । 19) यानी हमेशा शूद्रों अथवा उग्रों से आचार्य के हिस्से का धन वसूलना चाहिए ऐसा कुछ आचार्य कहते हैं।Continue Reading
पूर्वाभिमुख भए कुश सहित- ओम् तर्पणीयाः देवा आगच्छन्तु। ओम् ब्रह्मादयस्तृप्यन्ताम्। उत्तराभिमुख भए- ओम् सनकादय आगच्छन्तु। ओम् सनकादयस्तृप्यन्ताम्Continue Reading
I have a manuscript dealing with the history of Mithila. I have found it in scattered position with some another old papers and a manuscript in Devanagari,Continue Reading
मिथिलाक चौहद्दी आ ओकर गौरवगाथाक वर्णन अनेक स्थान पर भेटैत अछि, मुदा ई सभ आर्ष-ग्रन्थ कोन कालक थीक से निर्णीत नै अछि। Continue Reading
“MAIT H I LA or Tirhutiya is the language used in Mithālā that is in the Sircár of Tirhát and in some adjoining districts limited Continue Reading