Rameshvar Singh of Darbhanga

कांची के मदुरै में आयोजित सभा में त. शं. नारायण शास्त्री ने कहा था कि “आज भारतवर्ष में धार्मिक पतन को रोकने में केवल दरभंगा के राजा रमेश्वर सिंह एवं परमात्मा ईश्वर समर्थ हैं, अन्य कोई नहीं…”Continue Reading

Arts College Hostel

लेकिन दरभंगा के महाराज रमेश्वर सिंह का यह अनुदान इस शर्त पर दिये गया थी कि बिहार के सनातनी छात्रों को इसमें प्रवेश में प्राथमिकता दी जायेगी। यहाँ ध्यातव्य है कि उन्होंने नाम जोड़ने की कोई शर्त नहीं रखी थी।Continue Reading

samvedana

डा० सिन्हा चोट्टे घूरि घर गेलाह। लैपटॉप खोललनि आ अपन सहयोगी सभके ई-मेल कएल- “हमर शोध लेल वरदक स्पेसीज उपयोगी नै होएत। अहाँ सभ दोसर कोनो जानवरक खोज करू जकरामे भावना नै रहए। Continue Reading

यह अंक विषयों की विविधता से भरा हुआ है। इसमें भारत की शक्ति-उपासना, कृष्ण-उपासना, गणेश-उपासना, पितृ-उपासना, लक्ष्मी-उपासना तथा लोकदेवताओं की उपासना से सम्बन्धित प्रामाणिक सामग्री संकलित किये गये हैं। साथ ही, विशिष्ट आलेख के रूप में धर्म के स्रोतों पर विवेचन किया गया है।Continue Reading

Kadamon ke Nishan

मैथिली कविता में प्रतिष्ठित कवि डॉ. धीरेन्द्र सिंह ने साझा संकलन ‘डेग’ और स्वतंत्र संकलन ‘पितामहक नाम’ के माध्यम से मैथिली कविता में अपनी उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई थी। ‘जो गै बसंती’ कथा-संग्रह भी चर्चित रहा। बाद में डॉक्टरी पेशे में मिलती गयी दिन-ब-दिन की सफलता ने इन्हें इतना अधिक व्यस्त रखा कि साहित्य में इनकी सक्रियता घटती चली गयी। मगर अब अपने लेखन की दूसरी पारी में वे फिर से सक्रिय हैं। धीरेन्द्र सिंह की कविताएँ जीवन-मूल्य की पड़ताल करती हैं। शोषित-पीड़ित जनता के दुख-दर्द का साझीदार बनती इनकी कविताओं में आत्मा की पुकार है। भाषा बहुत ही सहज और हृदयग्राही है। इस संग्रह से हिन्दी के पाठक मैथिली कविता के एक अलग रूप से परिचित होंगे, जिसमें सादगी के साथ तीखापन है।Continue Reading