मिथिलाक्षर के विकास के लिए सरकारी स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता
मिथिलाक्षर अथवा तिरहुता बृहत्तर सांस्कृतिक मिथिला क्षेत्र की लिपि है। इसका प्राचीन नाम हम पूर्ववैदेह लिपि के रूप में ललितविस्तर में पाते हैं। ऊष्णीषविजयधारिणी नामक ग्रन्थ की 609 ई. की एक पाण्डुलिपि में जिस सिद्ध-मातृका लिपि की सम्पूर्ण वर्णमाला दी गयी है, उस लिपि से लिच्छिवि गणराज्य से पूर्व की ओर एक न्यूनकोणीय लिपि का विकास हुआ है, जिस परिवार में वर्तमान काल में मिथिलाक्षर, बंगला, असमिया, नेबारी, उड़िया, एवं तिब्बती लिपियाँ है। इस प्रकार यह अत्यन्त प्राचीन एवं पूर्वोत्तर भारतीय बृहत्तर परिवार की लिपि है।Continue Reading
डॉ० पं. आमोद झा ‘निर्मोदः’ व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व
स्व. डा. आमोद झा मिथिलाक कुशल पाण्डुलिपि-विज्ञानी रहथि। ई अनेक संस्कृत ग्रन्थ कें मिथिलाक्षरक पाण्डुलिपिसँ लिप्यन्तरण कए ओकर सम्पादन कएने रहथि। कमे समयमे हिनक कएल काज सभ दिन महत्त्वपूर्ण रहल। दुर्भाग्य जे अल्प अवस्थामे 1993 ई. मे हिनक देहान्त भेल आ मिथिलाक्षरक एकटा पाण्डुलिपि-शास्त्री सँ हमरालोकनि वंचित भए गेलहुँ। हिनक असमय देहान्त सँ एकटा अपूरणीय क्षति भेल छैक।Continue Reading
डॉ० (प्रो.) शशिनाथ झा, व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व
मिथिला के आधुनिक विद्वानों में अन्यतम डा. शशिनाथ झा, एक साथ मिथिला के इतिहास, पाण्डुलिपिशास्त्र, संस्कृत व्याकरण, साहित्य, धर्मशास्त्र आदि के विद्वान् हैं। इन्होंने सौ से अधिक ग्रन्थों का सम्पादन तथा लेखन किया है।Continue Reading
अशोक पेपर मिलक अन्तिम साँस
अशोक पेपर मिल बंद हेबाक कारण बिहारक तत्कालीन मंत्रीगण छलाह जे स्वार्थक कारणें एकरा खतम कएलनि।Continue Reading
मिथिलाक सोतिपूरामे वैदिक विवाहक विशिष्ट रीति-रेवाज, भाग 1
मिथिलामे ब्राह्मणक एकटा समूह अछि जे सोति कहबैत छथि। सोतिमे विवाहक प्रक्रिया बड़ उदार अछि। एहिमे दहेज नामक कोनो वस्तु नै अछि। विवाहमे आइयो आडम्बर त्याज्य अछि।Continue Reading
डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह ‘संजय’ व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व
डॉ. जितेन्द्र न केवल कवि, साहित्यकार, आलोचक, भाषाविद् एवं इतिहासकार हैं, अपितु सामाजिक सरोकार रखनेवाले सहृदय व्यक्ति भी हैं।Continue Reading
मिथिलाक सोतिपूरामे वैदिक विवाहक विशिष्ट रीति-रेवाज, भाग 2
अनदेसी परम्पराकें जे हमरालोकनि अपनाए खर्च कें बढाबा दैत छी तँ ताहि पर ध्यान देबाक चाही। ई सभ अपव्यय अन्ततः दहेज कें बढ़ाबा दैत अछि।Continue Reading
मिथिलाक सोतिपूरामे वैदिक विवाहक विशिष्ट रीति-रेवाज, भाग 3
जखने विवाहकें एकटा पवित्र संस्कार मानल जाए लागत तखनहिं बेसी लम्फ-लम्फाक दिससँ लोक विरत होएताह आ दहेज बहुत कम भए जाएत। कन्याक महत्त्व बढ़त, भौतिकवादक स्थान पर एकर आध्यात्मिक महत्त्वक मानसिकता जागत आ दहेजक दिससँ मोन टुटत।Continue Reading
Ram Bharos Kapari Bhramar
मैथिली आ मिथिलाक लेल समर्पित लेखक, सम्पादक, पत्रकार श्री राम भरोस कापरि भ्रमर वर्तमानमे नेपालीय मैथिली साहित्यक सशक्त हस्ताक्षर छथि।Continue Reading
डॉ. सुशान्त कुमार व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व
मिथिला के इतिहास एवं पुरातत्त्व, विशेष रूप से मूर्ति-विज्ञान एवं वास्तु कला पर कार्य करनेवाले आधुनिक विद्वानों में डा. सुशान्त कुमार का नाम लिया जा सकता है। इनका यह कार्य निर्बाध गति से चलता रहे इसी शुभकामना के साथ….Continue Reading









