Sticky

यह अंक विषयों की विविधता से भरा हुआ है। इसमें भारत की शक्ति-उपासना, कृष्ण-उपासना, गणेश-उपासना, पितृ-उपासना, लक्ष्मी-उपासना तथा लोकदेवताओं की उपासना से सम्बन्धित प्रामाणिक सामग्री संकलित किये गये हैं। साथ ही, विशिष्ट आलेख के रूप में धर्म के स्रोतों पर विवेचन किया गया है।Continue Reading

Sticky
Akbar's view on Hinduism

से व्यक्ति ने तुजुक ए जहाँगीरी का अनुवाद फारसी के स्रोत के आधार पर किया तथा उसे Memoirs Of The Emperor Jahangueir के नाम से 1829 ई. प्रकाशित कराया। इसका प्रकाशन ओरियंटल ट्रांसलेशन कमिटी के द्वारा कराया गया। डेविड प्राइस ने जिस संस्करण से अनुवाद किया था, वह 1040 हिजरी की लिखी हुई थी। मिस्टर मार्ले ने इसी आधार पर प्राइस वाली प्रति को प्रामाणिक माना है। उऩका मन्तव्य है कि इतनी शीघ्र प्रतिलिपि करते हुए कोई व्यक्ति अपने मन से प्रक्षिप्त अंश को जोड़कर लोगों को धोखा नहीं दे सकता है। जहाँगीरनामा के हिंन्दी अनुवादक व्रजरत्नदास ने काशी नागरी प्रचारिणी सभा से प्रकाशित जहाँगीर का आत्मचरित पुस्तक की भूमिका पृष्ठ संख्या 7 पर इन तथ्यों का स्पष्टीकरण दिया है।Continue Reading

Sticky
history of Vishwakarma-puja

विश्वकर्मा पूजा 17 सितम्बर को ही क्यों मनाया जाता है? हमारे सभी पर्व-त्योहार भारतीय पंचांगों के अनुसार मनाया जाता है, किन्तु विश्वकर्मा पूजा हम अंगरेजी कैलेंडर के अनुसार क्यों मनाते हैं ?Continue Reading

संस्कृत पाठमाला- भवनाथ झा

विभक्तियाँ तो सात हैं किन्तु कारक छह ही हैं। षष्ठी विभक्ति अतिरिक्त है। चूँकि सम्बन्ध में शब्दों का क्रिया के साथ सम्बन्ध नहीं रहता है, इसलिए सम्बन्ध को कारक नहीं माना गया है।Continue Reading

manuscript price

प्रत्येक 32000 अक्षरों के लिए एक रुपया यानी बारह आना. इस दर से महाभारत की कीमत साठ रुपये। रामायण की कीमत चौबीस रुपये, श्रीमदभागवत की अठारह और अन्य पुस्तकों के आकार के हिसाब से कीमत चुकानी पड़ती है. जिस कागज़ से पुस्तकों की प्रति लिपियाँ तैयार की जाती हैं उन्हें तुलात कहा जाता है. कीटाणुओं से बचाव के लिए इनमें एक ख़ास रंग का उपयोग किया जाता है जो पीले रसायन और इमली के रस से तैयार किया जाता है.Continue Reading

संस्कृत पाठमाला- भवनाथ झा

पिछले 5 पृष्ठों से हम संस्कृत भाषा सीखने के लिए पाठमाला दे रहे हैं। इसके अन्तर्गत सबसे पहले शब्दरूपों को कंठस्थ करने का पाठ आरम्भ किया है। अभीतक हमने शब्दों के रूपों को कण्ठस्थ करने की अनुशंसा की है। इतने शब्दों के रूप कण्ठस्थ कर लेने के बाद अब संस्कृत वाक्य प्रयोग में सबसे पहले विशेष्य-विशेषण भाव को समझ लेना आगे के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
हिन्दी का एक वाक्यखण्ड लें– “लाल रंग के फूल से देवी की पूजा।” यहाँ हिन्दी की वाक्य-योजना के अनुसार ‘के’ परसर्ग का प्रयोग है जो संबन्ध कारक का सूचक है। इसका अनुवाद करने में लोगों को भ्रम होता है। लोग सीधे तौर पर कह देते है- रक्तवर्णस्य पुष्पेण देव्याः पूजनम्। किन्तु संस्कृत में इसका अनुवाद होना चाहिए- रक्तवर्णेन पुष्पेण देव्याः पूजनम्। क्योंकि रक्तवर्ण पुष्प की विशेषता बतलाने के कारण विशेषण है।
Continue Reading

First Indian Lady teacher

एक महिला ने काशी में जाकर 18वीं शती में स्कूल खोलकर महिलाओं और खासकर विधवाओं को पढ़ाने-लिखाने का कार्य आरम्भ किया। पर, इतिहास से उसका नाम मिटा दिया गया।Continue Reading

Kadamon ke Nishan

मैथिली कविता में प्रतिष्ठित कवि डॉ. धीरेन्द्र सिंह ने साझा संकलन ‘डेग’ और स्वतंत्र संकलन ‘पितामहक नाम’ के माध्यम से मैथिली कविता में अपनी उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई थी। ‘जो गै बसंती’ कथा-संग्रह भी चर्चित रहा। बाद में डॉक्टरी पेशे में मिलती गयी दिन-ब-दिन की सफलता ने इन्हें इतना अधिक व्यस्त रखा कि साहित्य में इनकी सक्रियता घटती चली गयी। मगर अब अपने लेखन की दूसरी पारी में वे फिर से सक्रिय हैं। धीरेन्द्र सिंह की कविताएँ जीवन-मूल्य की पड़ताल करती हैं। शोषित-पीड़ित जनता के दुख-दर्द का साझीदार बनती इनकी कविताओं में आत्मा की पुकार है। भाषा बहुत ही सहज और हृदयग्राही है। इस संग्रह से हिन्दी के पाठक मैथिली कविता के एक अलग रूप से परिचित होंगे, जिसमें सादगी के साथ तीखापन है।Continue Reading

पूजा में सामग्री की व्यवस्था करने का कोई अंत नहीं है। आप अपने विभव के अनुसार धोती, साड़ी, सोना, चाँदी आदि भी अर्पित कर सकते हैं। किन्तु सनातन धर्म के अधिकतम श्रद्धालु मध्यमवर्गीय हैं। उनके लिए धन बहुत मायने रखता है। ऐसे लोगों के लिए हम पद्धति भी प्रकाशित करContinue Reading

गणेश-पूजा-पद्धति

भगवान् गणेश की पूजा विधि। स्वयं इसे देखते हुे आप आसानी से मन्त्रों को पढकर विभिन्न अवसरों पर भगवान् गणेश की पूजा कर सकते हैं। साथ ही, यहाँ अनेक प्रकार के मन्त्र भी दिये गये हैं। हवन विधि के साथContinue Reading

gold in patna Soil

रॉल्फ फिच नामक यात्री ने भारत भ्रमण के दौरान आगरा से बंगाल के सतगाँव जाने के क्रम में पटना शहर का भ्रमण किया था। उसने विवरण दिया है कि पटना के लोग मिट्टी खोदकर उसे धोते थे तो उससे सोना निकलता है। इस प्रकार मिट्टी को खोदते खोदते कुँआँ बन जाता है।Continue Reading