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दशमहाविद्या

मिथिलाक प्रसिद्ध पाबनि-तिहार एवं व्रत आदि स्रोत- ई सूची कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालयक पंचागक आधार पर बनाओल गेल अछि। श्रावण- साओन मासक व्रत-पर्व अशून्यशयन मौनापञ्चमी- कृष्णपक्ष, पंचमी तिथि, मनसा-देवी जागरण एवं पूजा मधुश्रावणी-पूजारम्भ- श्रावण कृष्ण पञ्चमी मधुश्रावणी व्रत एवं पूजा- श्रावण शुक्ल तृतीया नागपञ्चमी- श्रावण शुक्ल पञ्चमी शीतलापूजा- श्रावण शुक्लContinue Reading

Responsibilities of a Brahmana

सच्चाई यह है कि छठपर्व की भी पूरे विधान के साथ पुरानी पद्धति है, पूजा के मन्त्र हैं, पूजा के समय कही जानेवाली कथा है। संस्कृत में वेद तथा पुराण से संकलित मन्त्र हैं। मगध में ङी ऐसी पद्धति है, मिथिला में तो बहुत पुराना विधान है। म.म. रुद्रधर ने प्रतीहारषष्ठीपूजाविधिः के नाम इसकी पुरानी विधि दी है। वर्षकृत्य में यह विधि उपलब्ध है।Continue Reading

पटना में मिली-जुली संस्कृति है। मिथिला की संस्कृति के लोग भी रहते है। सब मिलजुल कर दीपावली मनाते रहे हैं। मिथिला के लोग गोधूलि वेला में पूजा करते हैं, उनकी वही परम्परा है। सन्ध्या होते ही दीप जलाते हैं, विशेष पूजा करते हैं तथा मखाना का खूब उपयोग करते हैं।Continue Reading

यह एक प्रामाणिक उल्लेख मिलता है, जिससे स्पष्ट होता है कि जन्मभूमि पर प्राचीन काल में माता कौसल्या की गोद में बैठे श्रीराम की मूर्ति वहाँ थी। आज भी यदि वैसी ही मूर्तियाँ लगे तो श्रीराम जन्मभूमि अपनी खोयी हुई गरिमा को पा जाये।Continue Reading

Haritalika puja

जनक-याज्ञवल्क्य की धरती मिथिला एक ओर यजुर्वेद एवं शतपथ-ब्राह्मण की वैदिक परम्परा की भूमि रही है तो दूसरी ओर आगम-परम्परा में शक्ति-पूजन के लिए विख्यात रही है। यहाँ वैदिक परम्परा और आगम-परम्परा दोनों समानान्तर चलती रही है किन्तु मिथिला के पड़ोसी क्षेत्रों की धार्मिक परम्परा से यह स्पष्ट अन्तर हैContinue Reading

राम दरबार

श्रीराम के बगल में बैठी हुई सीताजी ने इससे आगे का आशीर्वाद दे डाला कि हनुमानजी देवता के रूप में पूजित होंगे। जहाँ हनुमानजी का स्मरण किया जायेगा, वहाँ पेड़ों पर अमृत के समान फल लगेंगे, स्वच्छ जल का प्रवाह बहता रहेगा।Continue Reading

भण्डारकर ओरियण्टल रिसर्च इंस्टीच्यूट, पूना से वाल्मीकीय रामायण का आलोचनात्मक संस्करण प्रकाशित हुआ जो पाठ भेदों को समझने के लिए स्थानीय प्रक्षेपों को, अपपाठों को जानने के लिए महत्त्वपूर्ण कार्य है।Continue Reading

विलियम कैरी एसियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल के सदस्य थे। वाल्मीकि रामायण का प्रकाशन गद्यानुवाद के साथ किया, जो 3 खण्डों में सेरामपुर प्रेस से 1806-07 में प्रकाशित हुआ।Continue Reading

Schlegel's Ramayan

1846 ई. में विलियम वॉन श्लेगल ने वाल्मीकि रामायण के दो काण्डों बालकाण्ड एवं अयोध्याकाण्ड का सम्पादन लैटिन अनुवाद के साथ किया।Continue Reading

वाल्मीकि रामायण का लाहौर संस्करण

पश्चिमोत्तर पाठ के मूल यहाँ संकलित हैं। इस संस्करण का भी हिन्दी अनुवाद नहीं हुआ है। काश्मीर का मुख्य रूप से पाठ होने के कारण यह अपनी विशेषता तथा प्राचीनता लिये हुए है।Continue Reading