vijaystambha from Karnat dynasty

हरिसिंहदेवक पराजय आ हिमालयक जंगल दिस भागि जेबाक तिथिक सम्बन्धमे जे परम्परागत श्लोक वर्तमानमे उपलब्ध अछि से भाषाक दृष्टिसँ ततेक अशुद्ध भए गेल अछि जे ओहि पर विश्वास करब कठिनContinue Reading

Yamaraja

जनिक मृत्यु शहरमे होइत छनि आ कोनो नदीक कातमे अंतिम-संस्कार होइत अछि, हुनकामेसँ अधिकांश लोकक लेल अपन परम्पराक पालन चाहिओ कए कठिन भए जाइत छनि।Continue Reading

Ghanto-puja in Mithila

लगभग 2010 ई. धरि ई पूजा होइत हम देखने छी। एहिमे डमरूक आकारक माँटिक पाँच आकृति, माँटिक दिबारी जकाँ एक आकृति तथा ओकर ढक्कन जकाँ दोसर आकृति एहि प्रकारें कुल सात आकृति बनाए तीन दिन पूजा कएल जाइत छल।Continue Reading

श्राद्ध आ एकोद्दिष्टक विषयमे कुतुप कालक विचार होइत अछि। एकोद्दिष्ट आदि पितृकर्म कोन तिथिक कोन दिन होएत आ कखनि आरम्भ करबाक चाही तकर विचार करबामे कुतुप आ रोहिण नामक दू मुहूर्तक विचार कएल जाइत अछिContinue Reading

Mithila painting

एहिसभ विषयकें आधुनिक लोक दकियानूसी बुझैत छथि। मुदा हमरालोकनिकें बुझबाक चाही जे हमर पूर्वज एकर निर्वाह कए गेल छथि। ई हमरासभक परम्परा थीक।Continue Reading

kalash

पुराणों के अनुसार धनतेरस अमृत कलश के साथ भगवान् धन्वन्तरि की उत्पत्ति का दिन है। इस दिन लोग, विशेष रूप से वैद्य, भगवान् धन्वन्तरि की उपासना करते हैं और उनकी कृपा से सभी लोगों के स्वस्थ रहने की प्रार्थना करते हैं।Continue Reading

kalash

जँ व्रत अथवा उपासक संकल्प कए लेल गेल छैक तँ अशौचहुमे व्रत-उपास, पूजा-पाठ आदि करबाक विधान कएल गेल छैक।Continue Reading

Sticky
chhathi vrat

सन्ध्याकाल नदी अथवा पोखरिक कछेर पर जाए अपन नित्यकर्म कए अर्थात् सधवा महिला गौरीक पूजा कए आ विधवा विष्णुक पूजा कए पश्चिम मुँहें सूर्यक दिस देखैत कुश, तिल आ जल लए संकल्प करी-Continue Reading