डाकवचन संहिता (टिप्पणी-व्याख्या सहित विशुद्ध पाठ, सम्पूर्ण)- डॉ. शशिनाथ झा
डाकक महत्ता सभ वर्गक लोकक लग समाने रहल अछि। हिनक नीति, कृषि ओ उद्योग सम्बन्धी वचन सभधर्मक लोक अपनबैत अछि। ई भ्रमणशील व्यक्ति छलाह, जतए जाथि, अपन व्यावहारिक वचनसँ सभके आकृष्ट कए लेथि। एहि क्रममे हिनक वचन बंगालसँ राजस्थान धरि पसरि गेल ओ एखनहुँ लोककण्ठमे सुरक्षित अछि, परन्तु ओहिपर स्थानीय भाषाक ततेक प्रभाव पड़ि गेल जे परस्पर भिन्न लगैत अछि। हिनका मिथिलामे डाक ओ घाघ, उत्तर प्रदेश आदिमे घाघ, बंगालमे डंक तथा राजस्थानमे टंक कहल जाइत अछि। ई अपन ‘वचन’ जनिकाँ सम्बोधित कए कहने छथि तनिकाँ मिथिला ने भाँडरि रानी, मगधमे भडुली तथा आनठाम भड्डरी कहल जाइत अछि। Continue Reading
वह कदम्ब का वृक्ष
मेरी पहली हिंदी कविता, जो 1982ई. में लिकी गयी थी, जब मैं 14 वर्ष का था।Continue Reading
मिथिलाक्षर पढ़बाक अभ्यास-माला- 2
मिथिलाक्षर सिखबाक क्रममे केवल लिखब पर्याप्त नहिं होइत अछि। आनक लिखल अक्षर पढ़ल होएबाक चाही। एही उद्देश्यसँ हम एकटा अभ्यासमाला आरम्भ कएल अछि।Continue Reading
मिथिलाक प्राचीन सदाचार 01
रवि दिन की सभ नहिं करी मिथिला मे प्राचीनकालक सदाचारक लेल सरोज-सुन्दर नामक एकटा अति संक्षिप्त पोथी अछि, जाहिमे सभ वर्णक लेल किछु आचार पालन करबाक प्रसंग आएल अछि। एहिमे सँ बहुतो एहन तथ्य अछि जे आइयो बूढलोकनिक मुँहसँ सुनैत छी। ओ लोकनि एकर पालनो करैत छथि। मगध क्षेत्रक परम्पराContinue Reading
मिथिलाक्षर पढ़बाक अभ्यास-माला 1
आनक लिखल मिथिलाक्षरकेँ पढ़बाक अभ्यास आवश्यक अछि, तेँ ई अभ्यास-माला हम आरम्भ कएल। एहि एक पत्र केँ पढ़ि कॉमेंट बॉक्समे अपन पाठ लीखि पठाबी हम ओकरा देखि उचित जानकारी देब।Continue Reading
कैथी, तिरहुता आ मिथिलाक्षर
ई भ्रम स्वयं पसरल अथवा पसारल गेल- पसारल जा रहल अछि, से खोजक विषय थीक। जँ जानि बूझि कए ई भ्रम पसारल जा रहल अछि तँ एकरा मिथिला आ मैथिलीक विरुद्ध बड़ पैघ षड्यंत्र बुझू।Continue Reading
कैंसर का ज्ञान- डा. धीरेन्द्र नारायण सिन्हा
छठ का अर्घ्य- पण्डितजी की जरूरत क्यों नहीं?
सच्चाई यह है कि छठपर्व की भी पूरे विधान के साथ पुरानी पद्धति है, पूजा के मन्त्र हैं, पूजा के समय कही जानेवाली कथा है। संस्कृत में वेद तथा पुराण से संकलित मन्त्र हैं। मगध में ङी ऐसी पद्धति है, मिथिला में तो बहुत पुराना विधान है। म.म. रुद्रधर ने प्रतीहारषष्ठीपूजाविधिः के नाम इसकी पुरानी विधि दी है। वर्षकृत्य में यह विधि उपलब्ध है।Continue Reading
पटना की दीपावली
पटना में मिली-जुली संस्कृति है। मिथिला की संस्कृति के लोग भी रहते है। सब मिलजुल कर दीपावली मनाते रहे हैं। मिथिला के लोग गोधूलि वेला में पूजा करते हैं, उनकी वही परम्परा है। सन्ध्या होते ही दीप जलाते हैं, विशेष पूजा करते हैं तथा मखाना का खूब उपयोग करते हैं।Continue Reading
अयोध्या में जन्मभूमि मन्दिर में मूर्ति कैसी थी?
यह एक प्रामाणिक उल्लेख मिलता है, जिससे स्पष्ट होता है कि जन्मभूमि पर प्राचीन काल में माता कौसल्या की गोद में बैठे श्रीराम की मूर्ति वहाँ थी। आज भी यदि वैसी ही मूर्तियाँ लगे तो श्रीराम जन्मभूमि अपनी खोयी हुई गरिमा को पा जाये।Continue Reading









